Rourkela News: बंडामुंडा की डीजल कॉलोनी में आवारा सांड़ के हमले में घायल युवा अधिवक्ता नीतीश अवतार की 45 दिन बाद गुरुवार को इलाज के दौरान मौत हो गयी. इसकी सूचना से पूरे क्षेत्र में शोक और भय का माहौल है. नीतीश अवतार डीजल कॉलोनी स्थित के-केबिन क्षेत्र के निवासी थे. 23 दिसंबर को वे अपने घर का गेट खोलकर अंदर प्रवेश कर रहे थे, तभी अचानक एक सांड़ ने उन पर हमला कर दिया था. हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गये थे.
तीन जनवरी को अस्पताल से मिली थी छुट्टी, चार को पुन: कराया गया भर्ती
परिजन तत्काल उन्हें इलाज के लिए राउरकेला अपोलो अस्पताल ले गये, जहां इलाज के बाद 11 दिन बाद तीन जनवरी को उन्हें छुट्टी मिल गयी और वे घर लौट आये. हालांकि, अगले ही दिन चार जनवरी को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गयी, जिसके बाद उन्हें दोबारा अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान गुरुवार सुबह करीब 4:15 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद डीजल कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में आवारा सांड़ों को लेकर भय और नाराजगी का माहौल है. स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में सांड़ों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे राहगीरों, बुजुर्गों और बच्चों की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है. स्थानीय निवासियों ने बताया कि घटना से पहले राउरकेला महानगर निगम (आरएमसी) की टीम डीजल कॉलोनी में सांड़ पकड़ने पहुंची थी, लेकिन निगमकर्मी उसे काबू में करने में असफल रहे. सांड़ खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि आरएमसी विभाग इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है.
परिजनों ने किया हंगामा, इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
नीतीश अवतार के मौत की खबर जैसे ही परिवार व परिचितों को मिली, वे तत्काल अपोलो अस्पताल पहुंच गये. जहां पर कुछ समय के लिए हंगामा की स्थिति बन गयी. लापरवाही का आरोप लगाते हुए लोगों ने अस्पताल परिसर के अंदर विरोध प्रदर्शन और हंगामा शुरू कर दिया. मृतक के परिजनों ने कहा कि इलाज में लापरवाही बरती गयी. इसके बाद परिजनों और अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों के साथ तीखी बहस हो गयी. नीतीश के चाचा रवि चंदर ने बताया कि वह करीब डेढ़ महीने पहले डीजल कॉलोनी इलाके में एक सांड़ के हमले में नीतिश गंभीर रूप से घायल हो गया था. तब से उसका अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था. चिकित्सकों ने जैसा कहा, हमने वैसा किया. परिजनों ने बताया कि बुधवार को नीतीश का ऑपरेशन हुआ. गुरुवार सुबह इलाज के दौरान नीतीश की हालत कथित तौर पर बिगड़ गयी और उसकी मौत हुई. परिजनों के हंगामे के कारण अस्पताल में स्थिति तनावपूर्ण हो गयी थी और मरीज के परिजनों और सुरक्षा गार्डों के बीच हाथापाई भी हुई. घटना की जानकारी अधिकारियों को दी गयी. खबर लिखे जाने तक, अस्पताल प्रबंधन की ओर से आरोपों के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
