राहुल गांधी की भारत यात्रा से ज्यादा भीड़ मेरी रैलियों में जुटती है, कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ का बयान

नकुलनाथ के इस बयान का वीडियो भाजपा के कई नेताओं ने शेयर किया है. इस वीडियो में नकुलनाथ यह कहते नजर आ रहे हैं कि राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में जो भारत जोड़ो यात्राएं कीं उनसे अधिक भीड़ उनकी रैली में शामिल हुई थी.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे पार्टी के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गयी है. नकुलनाथ ने कहा है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से अधिक उनकी रैली में भीड़ जुटती है.

भाजपा नेताओं ने शेयर किया वीडियो

नकुलनाथ के इस बयान का वीडियो भाजपा के कई नेताओं ने शेयर किया है. इस वीडियो में नकुलनाथ यह कहते नजर आ रहे हैं कि राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में जो भारत जोड़ो यात्राएं कीं उनसे अधिक भीड़ उनकी रैली में शामिल हुई थी.


राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल

भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस नेता नकुलनाथ के बयान वाला वीडियो शेयर करते हुए सोशल मीडिया में लिखा है कि जब खुद कांग्रेसी ही राहुल गांधी को महत्व नहीं देते तो फिर दूसरे उन्हें कैसे गंभीरता से लेंगे और भारतीय कैसे उनपर भरोसा करेंगे.

छिंदवाड़ा से सांसद हैं नकुलनाथ

नकुल नाथ मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रमुख कमल नाथ के बेटे हैं. वे छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से सांसद हैं. उन्होंने राहुल गांधी पर यह अजीबोगरीब टिप्पणी परासिया में की, जहां उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा निकाली थी.

राहुल की भारत जोड़ो यात्रा में थे शामिल

गौरतलब है कि राहुल गांधी बमुश्किल 15 दिन पहले मध्यप्रदेश में थे और नकुल नाथ उनके साथ कई यात्राओं में शामिल भी हुए थे. नकुल नाथ के इस बयान से पार्टी पसोपेश में है. कमलनाथ कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं और पार्टी उनपर पूरा भरोसा करती है. ऐसे में नकुल नाथ का यह बयान उनके लिए भी असमंजस की स्थिति उत्पन्न करेगा.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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