Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने बुधवार को अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद पद पर बने रहने को लेकर स्थिति साफ कर दी. उन्होंने Tata Sons के बोर्ड को बताया है कि वह 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद चेयरमैन पद के लिए पुनर्नियुक्ति नहीं मांगेंगे. हालांकि, वह तब तक Tata Sons के चेयरमैन बने रहेंगे. उनके इस फैसले के साथ ही Tata Group में अगले चेयरमैन को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
करीब चार दशक पहले Tata Group से अपने करियर की शुरुआत करने वाले Chandrasekaran आज देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक Tata Group के शीर्ष पद तक पहुंचे. 1987 में TCS से जुड़ने के बाद उन्होंने कंपनी के CEO और MD से लेकर Tata Sons के चेयरमैन तक का सफर तय किया. 2017 में उन्हें Tata Sons की कमान सौंपी गई थी.
कौन हैं N. Chandrasekaran?
Natarajan Chandrasekaran का जन्म 2 जून 1963 को तमिलनाडु के मोहनूर में हुआ था. उन्होंने तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल से पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने Applied Sciences में स्नातक किया और Regional Engineering College, Tiruchirappalli से MCA की डिग्री हासिल की.
Chandrasekaran ने 1987 में Tata Consultancy Services (TCS) के साथ अपने करियर की शुरुआत की. करीब दो दशक से अधिक समय तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने के बाद वह 2009 में TCS के CEO और MD बने. 2017 में Tata Sons के चेयरमैन बनने से पहले वह Tata Group के भीतर एक प्रमुख पेशेवर नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे.
TCS से Tata Group की कमान तक का सफर
Chandrasekaran की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि वह Tata परिवार से नहीं आते हुए भी समूह के सबसे बड़े पद तक पहुंचे. 2009 में TCS के CEO बनने के बाद उन्होंने कंपनी के वैश्विक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. जनवरी 2017 में उन्हें Tata Sons का चेयरमैन नियुक्त किया गया. फरवरी 2017 में उन्होंने पद संभाला. वह Ratan Tata के बाद समूह की कमान संभालने वाले प्रमुख पेशेवर चेहरों में शामिल हुए.
क्यों छोड़ रहे हैं Tata Sons का चेयरमैन पद?
Chandrasekaran के फैसले के पीछे पिछले कई महीनों से चल रही नेतृत्व संबंधी अनिश्चितता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. रिपोर्टों के अनुसार, फरवरी 2026 में उनके अगले पांच साल के कार्यकाल को लेकर Tata Sons बोर्ड में प्रस्ताव आया था, लेकिन उस पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी. इसके बाद करीब छह महीने तक उनकी पुनर्नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई.
अब Chandrasekaran ने खुद को अगले कार्यकाल के लिए उपलब्ध नहीं कराने का फैसला किया है. अपने बयान में उन्होंने Tata Group जैसे बड़े कारोबारी समूह के लिए नेतृत्व को लेकर समय रहते स्पष्टता को महत्वपूर्ण बताया है. कुछ मीडिया रिपोर्टों में Chandrasekaran और Tata Trusts के बीच रणनीतिक और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर मतभेद की बात भी कही गई है.
