लस्सी की दुकान से फास्ट फूड कार्ट तक, अंजली ने बदली अपनी जिंदगी

चक्रधरपुर की वायरल गर्ल अंजली हेम्ब्रम ने फास्ट फूड कार्ट शुरू कर स्वरोजगार की नई मिसाल पेश की है। जानिए कैसे संघर्ष से सफलता तक का उनका सफर प्रेरणादायक है।

चक्रधरपुर: सोनुवा प्रखंड के दिग्गीलोटा गांव की अंजली हेम्ब्रम की कहानी आज पूरे क्षेत्र में संघर्ष, आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बन गई है. कुछ समय पहले तक रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर अंजली अब अपने गांव में स्वरोजगार के जरिए न केवल खुद आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं और युवाओं को भी प्रेरित कर रही हैं.

एकलव्य आवासीय विद्यालय के सामने छोटी-सी लस्सी की दुकान चलाकर पहचान बनाने वाली अंजली ने अब अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए फास्ट फूड कार्ट की शुरुआत की है. बुधवार को जिला प्रशासन के सहयोग से अनुदान पर उपलब्ध कराए गए इस फूड कार्ट का उद्घाटन मनोहरपुर के विधायक जगत माझी ने फीता काटकर किया. उद्घाटन समारोह के दौरान स्थानीय लोगों की अच्छी-खासी भीड़ मौजूद रही और लोगों ने अंजली की इस उपलब्धि पर खुशी जताई.

अब चाउमीन, मंचूरियन, आलूचोप और चाय भी

अंजली ने बताया कि नए फूड कार्ट के माध्यम से वह अब लस्सी के साथ-साथ चाउमीन, मंचूरियन, आलूचोप, चाय तथा अन्य फास्ट फूड व्यंजन भी उपलब्ध कराएंगी. उनका उद्देश्य धीरे-धीरे अपने छोटे व्यवसाय को एक बड़े स्वरोजगार केंद्र के रूप में विकसित करना है, ताकि भविष्य में अन्य लोगों को भी रोजगार दे सकें.

उद्घाटन के बाद विधायक जगत माझी ने अंजली के स्टॉल पर बने व्यंजनों का स्वाद लिया और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए उन्हें डस्टबिन भेंट किया. उन्होंने कहा कि स्वच्छता और गुणवत्ता किसी भी व्यवसाय की सफलता की पहली शर्त है.

गांव में रहकर भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है

इस अवसर पर विधायक जगत माझी ने अंजली के जज्बे और मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही मार्गदर्शन से गांव में रहकर भी आत्मनिर्भर बना जा सकता है.

उन्होंने कहा, "अंजली हेम्ब्रम आज क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं. हमें ऐसी बेटियों पर गर्व है, जो कठिन परिस्थितियों से निकलकर अपने दम पर पहचान बना रही हैं. महिलाएं बड़े सपने देखें, उन सपनों को पंख लगाने का काम हम करेंगे."

विधायक ने महिलाओं से स्वरोजगार अपनाने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने का आह्वान किया.

संघर्ष से सफलता तक का सफर

अंजली हेम्ब्रम ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था, जब परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें दूसरे प्रदेशों में मजदूरी करनी पड़ी. गांव लौटने के बाद उन्होंने छोटी-सी लस्सी की दुकान शुरू की. शुरुआत में ग्राहक कम थे, लेकिन उन्होंने मेहनत और धैर्य नहीं छोड़ा.

उन्होंने कहा, "शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन मेहनत और लगन से सफलता जरूर मिलती है. मैं चाहती हूं कि हमारे गांव की लड़कियां और महिलाएं पलायन करने के बजाय अपने गांव में ही रोजगार के अवसर तलाशें."

अंजली ने अपने इस सफर में सहयोग के लिए विधायक जगत माझी, जिला प्रशासन तथा उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने कठिन समय में उनका उत्साह बढ़ाया.

वायरल वीडियो ने बदल दी जिंदगी

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले विधायक जगत माझी सोनुवा से लौटने के दौरान दिग्गीलोटा स्थित अंजली की लस्सी की दुकान पर रुके थे. वहां उन्होंने लस्सी का स्वाद लिया था. इस दौरान बना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. वीडियो वायरल होने के बाद अंजली की दुकान अचानक लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई और दूर-दूर से लोग उनकी लस्सी पीने पहुंचने लगे.

इसके बाद सिंहभूम की सांसद जोबा माझी, उपायुक्त मनीष कुमार सहित जिले के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उनकी दुकान पर पहुंचकर उनका उत्साहवर्धन किया. प्रशासन की पहल पर उन्हें अनुदान आधारित फूड कार्ट उपलब्ध कराया गया, जिससे उनके व्यवसाय को नई दिशा मिली.

स्थानीय लोगों में उत्साह

उद्घाटन समारोह में झामुमो प्रखंड अध्यक्ष सागर महतो, हेमंत सोरेन, डब्लू बानरा, अजय महाली, किशोर दास, दीपक माझी, अश्विनी महतो, भोला सुंडी, मनसा माझी, संजय जामुदा, रोशन दास, बबलू प्रधान सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे. ग्रामीणों ने कहा कि अंजली की सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित होंगी और स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाएंगी.

महिला सशक्तिकरण की नई पहचान

दिग्गीलोटा की यह साधारण युवती आज सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा का विषय बनी हुई है. लस्सी की छोटी दुकान से शुरू हुआ सफर अब फास्ट फूड कार्ट तक पहुंच चुका है. अंजली हेम्ब्रम की कहानी यह संदेश देती है कि यदि अवसर, सहयोग और आत्मविश्वास मिल जाए, तो गांव की बेटियां भी अपने सपनों को नई उड़ान दे सकती हैं.

सोनुवा क्षेत्र में अंजली की यह पहल केवल एक व्यवसाय की शुरुआत नहीं, बल्कि पलायन से स्वावलंबन और संघर्ष से सम्मान तक की प्रेरक कहानी बन चुकी है.


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लेखक के बारे में

By शीन अनवर

शीन अनवर वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक एवं स्नातकोत्तर तथा बी एड किया है. राजनीति, धर्म, शिक्षा के क्षेत्र में इन्होंने लंबा काम किया है. डिजिटल जर्नलिज्म में 5 साल का अनुभव है.

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