प्रतिनिधि, चक्रधरपुर राजधानी रांची के खेलगांव स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित आदिवासी छात्र संघ के 26वें स्थापना दिवस सह महाधिवेशन में झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का भव्य नजारा देखने को मिला. हजारों लोगों की उपस्थिति वाले इस विशाल आयोजन में चक्रधरपुर की श्री साई डांस अकादमी, ट्राइबल अखड़ा परफॉर्मिंग आर्ट्स के कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम में अकादमी के बच्चों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक जनजातीय नृत्य, बांस कला, सूप कला और सोहराय कला आकर्षण का केंद्र रही, जिसे दर्शकों ने लगातार तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा. अकादमी के निदेशक हस्ती मुखी के नेतृत्व में ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों से आए बच्चों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक लोककलाओं और आदिवासी जीवन शैली की जीवंत झलक मंच पर प्रस्तुत की. कलाकारों की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि आधुनिक दौर में भी जनजातीय संस्कृति अपनी मौलिकता और जीवंतता के साथ नई पीढ़ी तक पहुंच रही है. कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा तैयार की गई सूप कला पर उकेरी गई पारंपरिक जनजातीय चित्रकला राज्य के आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा को स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की गई. इस अनूठी कलाकृति को देखकर मंत्री ने कलाकारों की रचनात्मकता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की. उन्होंने बच्चों को सम्मानित करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रही है. अपने संबोधन में मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि जनजातीय कला और संस्कृति हमारी पहचान, स्वाभिमान और गौरव की अमूल्य धरोहर है. इन परंपराओं का संरक्षण केवल सांस्कृतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी विरासत को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण दायित्व भी है. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं. मंत्री ने विशेष रूप से श्री साई डांस अकादमी, ट्राइबल अखड़ा परफॉर्मिंग आर्ट्स के निदेशक हस्ती मुखी की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में भी गांवों एवं दूरस्थ क्षेत्रों के जनजातीय बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उनकी प्रतिभा को पहचान दिलाना अत्यंत प्रेरणादायक कार्य है. उन्होंने कहा कि हस्ती मुखी के नेतृत्व में अनेक प्रतिभाशाली बच्चों को मंच, सम्मान और नई पहचान मिली है. उनके प्रयास जनजातीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक सशक्त और अनुकरणीय पहल हैं. मंत्री ने कहा कि हस्ती मुखी द्वारा वर्षों से किए जा रहे प्रयासों के कारण कई जनजातीय बच्चे अपनी पारंपरिक कला, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रतिभा के माध्यम से राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. यह कार्य न केवल कलाकारों का भविष्य संवार रहा है, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उल्लेखनीय है कि श्री साई डांस अकादमी ट्राइबल अखड़ा परफॉर्मिंग आर्ट्स चक्रधरपुर पिछले कई वर्षों से जनजातीय एवं ग्रामीण पृष्ठभूमि के बच्चों, विशेषकर बालिकाओं, को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान कर रही है. संस्था जनजातीय लोकनृत्य, लोकसंगीत, बांस कला, सूप कला, सोहराय कला सहित विभिन्न पारंपरिक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार कार्यरत है. अकादमी के प्रशिक्षित कलाकार विभिन्न सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय मंचों पर झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. महाधिवेशन में प्रस्तुत जनजातीय कला एवं संस्कृति की रंगारंग झलक ने उपस्थित हजारों लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया. कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया कि झारखंड की जनजातीय संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि राज्य की पहचान और गौरव का प्रतीक है. वहीं हस्ती मुखी और उनकी संस्था द्वारा किए जा रहे सतत प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते जा रहे हैं.
हजारों लोगों के महाजुटान में गूंजी जनजातीय संस्कृति की गूंज, मंत्री चमरा लिंडा ने की हस्ती मुखी के प्रयासों की सराहना
रांची में आयोजित आदिवासी छात्र संघ के महाधिवेशन में जनजातीय संस्कृति का भव्य प्रदर्शन। मंत्री चमरा लिंडा ने हस्ती मुखी के प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

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