फेस सील से लैश होंगे कोरोना संदिग्ध के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्यकर्मी, SHG की महिलाएं कर रही निर्माण

कोरोना के संक्रमण से लड़ने के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है. ऐसे में जिला प्रशासन डीडीसी आदित्य रंजन के इनोवेटिव आइडिया से कोरोना के विरूद्ध सेवा दे रहे चिकित्सकों संग स्वाथ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर तरह-तरह के उपाय कर रहा है. अबतक जिले में कोरोना संदिग्धों का सैंपल कलेक्ट करने को लेकर फोन बूथ कलेक्शन सेंटर व चक्रधरपुर में चिन्हित कोरोना स्पेशल हॉस्पिटल में सैनिटाइजेशन रूम की स्थापना की जा चुकी है.

चाईबासा : कोरोना के संक्रमण से लड़ने के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है. ऐसे में जिला प्रशासन डीडीसी आदित्य रंजन के इनोवेटिव आइडिया से कोरोना के विरूद्ध सेवा दे रहे चिकित्सकों संग स्वाथ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर तरह-तरह के उपाय कर रहा है. अबतक जिले में कोरोना संदिग्धों का सैंपल कलेक्ट करने को लेकर फोन बूथ कलेक्शन सेंटर व चक्रधरपुर में चिन्हित कोरोना स्पेशल हॉस्पिटल में सैनिटाइजेशन रूम की स्थापना की जा चुकी है.

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इसी कड़ी में जिले के घर-घर जाकर संदिग्धों की खोज करने वाले स्वाथ्यकर्मियों संग वॉलेंटियर्स के साथ ही कोरोना संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने वाले चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन ने फेस सील मास्क तैयार किया है. इस फेस सील मास्क को कोरोना संदिग्ध के संपर्क में आने वाले स्वास्थकर्मी मास्क के उपर हेलमेट की तरह पहन सकेंगे.

इस संबंध में डीडीसी आदित्य रंजन ने बताया कि इसे खासकर वैसे स्वास्थकर्मियों के लिए तैयार किया गया है, जो कि कोरोना संदिग्ध मरीज के सीधे संपर्क में रहेंगे. उन्होंने बताया कि फेस सील को विशेष प्रकार के ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक का उपयोग कर तैयार किया गया है. साथ ही इसे कैप की तरह सिर में आसानी से फिट किया जा सकता है. वहीं पसीने को सोखने के लिए इसके आगे सिर की ओर फॉर्म लगाया गया है. ताकि पहनने में यह आरामदायक लगे. उन्होंने बताया कि बाजार से खरीदने पर इसकी किमत 300 से 400 रुपये पड़ रही थी. जबकि जिला प्रशासन द्वारा इसे तैयार कराने में मात्र 110 रुपये लागत आयी है.

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By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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