प्रतिनिधि, नोवामुंडी
नोवामुंडी वन क्षेत्र के बड़ापासया, गीति केंदु, डूमरजुवा और आसपास के इलाकों में 15 हाथियों के एक झुंड की मौजूदगी से ग्रामीणों में भारी दहशत है. हाथियों द्वारा लगातार किए जा रहे उत्पात की सूचना मिलते ही सोमवार को वन विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ने के लिए देर रात तक एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाया गया.
थर्मल ड्रोन से ट्रैकिंग, बंगाल की विशेष टीम ने संभाला मोर्चा
हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर भेजने के लिए वन विभाग की टीम के साथ पश्चिम बंगाल से बुलायी गयी 10 सदस्यीय प्रशिक्षित 'हाथी भगाओ टीम' और नोवामुंडी, चाईबासा व हाटगम्हरिया की क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला. घने जंगलों में हाथियों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए दो अत्याधुनिक थर्मल ड्रोन कैमरों की मदद ली गयी. टीम ने रातभर मशाल, टॉर्च और पटाखों के सहारे हाथियों की निगरानी की और उन्हें आबादी से दूर धकेला. वन विभाग को शुरुआती सफलता डूमरजुवा क्षेत्र केडूरसु लागुरी तालाब के पास मिली, जहां से हाथियों को नोगरा और हाटगम्हरिया वन क्षेत्र की ओर खदेड़ा गया. इस दौरान बच्चों समेत 11 हाथियों का मुख्य झुंड सुरक्षित जंगल की ओर चला गया. अभियान के दौरान 4 हाथी अपने मुख्य झुंड से बिछड़कर अलग-अलग स्थानों पर भटक गए, जिन्हें दोबारा मिलाने के लिए रेस्क्यू टीम जुटी रही. डूमरजुवा फुटबॉल मैदान के समीप महाबुरु जंगल में भी हाथियों की हलचल देखी गयी. वन विभाग की टीम मंगलवार सुबह 5 बजे तक अभियान में मुस्तैद रही. अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीणों की सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्र में लगातार गश्त जारी रहेगी.
