चक्रधरपुर से रवि शंकर मोहंती की रिपोर्ट
Chakradharpur Hospital, चक्रधरपुर : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्यकर्मियों और चिकित्सकों को गंभीर आवासीय संकट का सामना करना पड़ रहा है. अस्पताल परिसर में बने सरकारी क्वार्टर अत्यंत जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं, जिससे यहां रहने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर हर वक्त खतरा मंडरा रहा है. कई आवास अब रहने योग्य बिल्कुल नहीं रह गए हैं, जिसके कारण चिकित्सकों को शहर के निजी मकानों में महंगे किराये पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. अस्पताल परिसर में स्थित ये आवास वर्षों पुराने हैं और नियमित रखरखाव व मरम्मत के अभाव में भवनों की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं. छतों से कंक्रीट और प्लास्टर का झड़ना यहां आम बात हो गई है. सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के दिनों में होती है, जब कमरों की छतों से लगातार पानी टपकता है. ऐसे बदतर हालात में कई स्वास्थ्यकर्मी परिसर छोड़कर बाहर रहने को विवश हैं, जिसका सीधा असर अस्पताल की आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाओं पर पड़ रहा है. कर्मचारियों का कहना है कि यदि वे परिसर में रहते, तो इमरजेंसी स्थिति में तुरंत मरीजों तक पहुंच सकते थे, लेकिन अब दूर रहने के कारण अस्पताल पहुंचने में कीमती समय बर्बाद हो जाता है.
अफसरों के निरीक्षण के बाद भी नहीं बदले हालात
अस्पताल की इस बदहाल स्थिति से जिला प्रशासन पूरी तरह अवगत है. समय-समय पर जिले के विभिन्न उच्च अधिकारियों द्वारा अस्पताल का निरीक्षण भी किया जाता है और मूलभूत सुविधाओं में सुधार के बड़े-बड़े निर्देश भी दिए जाते हैं. हालांकि, अस्पताल कर्मियों और स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि अब तक जमीनी स्तर पर कोई अपेक्षित बदलाव नहीं दिखा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है, ताकि वे चौबीसों घंटे बिना किसी मानसिक तनाव के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें. अस्पताल के प्रधान लिपिक पवन कुमार ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए बताया कि इन जर्जर क्वार्टरों में रहना किसी भी समय बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा है. वहीं, ऑफिस स्टाफ धीरज दास ने कहा कि रात में इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात कर्मियों को बाहर से अस्पताल पहुंचने में अतिरिक्त समय लग जाता है, जो मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
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नए भवन निर्माण के लिए सिविल सर्जन को लिखा गया पत्र
अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अंशुमान शर्मा ने भी इस समस्या को बेहद गंभीर माना है. उन्होंने आधिकारिक बयान में कहा कि अस्पताल परिसर में डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बने सरकारी क्वार्टर काफी जर्जर हो चुके हैं, जिससे वहां रहना अब सुरक्षित नहीं रह गया है. आवासीय सुविधा के अभाव में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर दिख रहा है. उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए जिला सिविल सर्जन को एक आधिकारिक पत्र लिखा गया है, जिसमें इन जर्जर क्वार्टरों को ध्वस्त कर उनके स्थान पर नए आधुनिक आवासीय भवनों के निर्माण की मांग की गई है ताकि स्वास्थ्यकर्मी निर्बाध रूप से मरीजों की सेवा कर सकें.
अस्पताल में विशेषज्ञों की भारी कमी
आवासीय संकट के बीच चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल डॉक्टरों और विशेषकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी से भी जूझ रहा है. अस्पताल में सर्जन, शिशु रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण डॉक्टरों के पद पूरी तरह खाली पड़े हैं. वर्तमान में केवल अनुबंध पर एक स्त्री रोग विशेषज्ञ और रेगुलर तौर पर एक डेंटिस्ट ही सेवाएं दे रहे हैं. इसके अलावा कई तकनीकी और चतुर्थवर्गीय पदों पर भी नियमित कर्मचारियों की जगह अनुबंध या आउटसोर्सिंग के भरोसे काम चलाया जा रहा है.
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