चक्रधरपुर : एक खुतबे में हजरत अली फरमाते हैं तीन घरों में अल्लाह का कहर कभी भी नाजिल हो सकता है, अल्लाह को सख्त नफरत है इन तीन घरों से. जिस घर में औरत की आवाज मर्द की आवाज से तेज हो जाये, उस घर को 70,000 फरिश्ते सारा दिन कोसते रहते हैं. जिस घर में किसी के हक का मारा हुआ पैसा जमा हुआ हो और उसी मारे हुए हक के पैसों से उस घर की रोशनी और तकब्बुर हो तथा तीसरा जिस घर के लोगों को मेहमानों का आना पसंद नहीं है.
हजरत जिबरील अमीन फरमाते हैं उस घर की नमाजों का सवाब फरिश्ते लिखा नहीं करते हैं. रोजा रखने से पहले उक्त तीनों बुराइयों से हमें पाक हो जाना चाहिए. वरना हमारे रोजे भी कबूल नहीं होंगे. कुरान फरमाता है ऐ ईमान वालों तुम पर रोज़े फर्ज किये गये हैं. जिस तरह तुमसे पहले लोगों पर फर्ज किए गये थे ताकि तुम परहेजगार बनो (सुरह अल-बक़रा 2, आयत 183). उस शख्स का रोजा नहीं जिसने रात ही से रोज़े की नियत न की हो (अबु दाऊद : 2454 इमाम बुखारी, तिर्मिज़ी, नसाई). रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ने फरमाया जिसने किसी रोजेदार को इफ्तार कराया तो उसे भी उसके बराबर सवाब मिलेगा, और रोजेदार के अज्र में कोई कमी न होगी.
रोजेदार को फहाशी व बेहयाई से दूर रहना चाहिए. जब तुम रोजे से हो तो बेहयाई से बचे रहो (बुखारी: अल्फतह 1904). रोजेदार के मुंह की बू अल्लाह के नजदीक मुश्क की खुशबु से भी ज्यादा पाकीजा है (सहीह मुस्लिम 2/807). जो अल्लाह के रास्ते में एक दिन का रोजा रखे, उस एक दिन के बदले अल्लाह तआला उसके चेहरे को (जहन्नुम की) आग से सत्तर साल की मसाफत की दूरी पर कर देगा (सहीह मुस्लिम 2/808).
