प्रभारी कुलपति के खिलाफ सुलग रहे शिक्षक ने चेताया, कहा
जमशेदपुर/चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय में पिछले चार माह के दौरान जिन कार्यो का निबटारा व जो भी निर्णय हुए, उन्हें लेकर शिक्षक क्षुब्ध हैं. वे कहते हैं कि कुलपति के नहीं होने के कारण कई निर्णय मनमाने तरीके से लिये जा रहे हैं. चार माह से सिंडिकेट की मीटिंग नहीं होने के कारण कई एजेंडे पर निर्णय नहीं लिये जा सके हैं.
विश्वविद्यालय के कुछ डीन व पीजी हेज ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि प्रभारी कुलपति प्रशासनिक पदाधिकारी हैं. इसलिए वे शिक्षकों की महत्ता नहीं समझ रहे हैं. यहां एडमिनिस्ट्रेशन की अपेक्षा एकेडमिक्स होना जरूरी है. लेकिन प्रभारी कुलपति नहीं समझ रहे हैं. इसलिए शिक्षकों को वह अपने हाथों की कठपुतली समझ रहे हैं.
बैठक बगैर पीजी हेड्स की नियुक्ति
हाल ही में स्नातकोत्तर विभागाध्यक्षों की नियुक्ति में सीनियरिटी लिस्ट की अनदेखी की गयी है. इसके अलावा नियुक्ति से पूर्व सीनियरिटी कमेटी की बैठक भी नहीं की गयी. विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने जो सूची सौंपी, उस पर मुहर लगा दी गयी. दूसरी ओर तीन स्नातकोत्तर विभागाध्यक्षों ने योगदान करने से इनकार किया है, जिस पर प्रभारी कुलपति ने उनके पांच वर्ष तक किसी भी प्रशासनिक पद पर योगदान पर रोक लगाने की बात कही है. इस पर भी शिक्षकों ने आपत्ति जतायी है. उन्होंने बताया कि फिलॉस्पी में नियुक्त विभागाध्यक्ष डॉ लक्ष्मी झा ने स्वास्थ्य कारणों से योगदान करने से इनकार किया है. इस पर विचार के बजाय कार्रवाई की बात कही गयी है.
छात्र संघ चुनाव व कई मुद्दे लटके
उन्होंने बताया कि प्रभारी कुलपति विश्वविद्यालय में समय नहीं दे पा रहे हैं. पिछले दिसंबर माह में ही सिंडिकेट मीटिंग के लिए उनके पास फाइल भेजी गयी थी, बावजूद अभी तक उस पर मंजूरी नहीं मिली. सेंट्रलाइज्ड बीएड नामांकन व प्रवेश परीक्षा, रोटेशन के आधार पर पीजी हेड्स की नियुक्ति आदि निर्णय सिंडिकेट मीटिंग के बगैर ही ले लिये गये.
पार्ट वन में एडमिशन की चिंता
सिंडिकेट मीटिंग न होने के कारण कॉलेज भी चिंतित है. कई कॉलेजों की संबद्धता की फाइल विश्वविद्यालय में ही पड़ी है, तो इंटर की परीक्षा के बाद स्नातक पार्ट वन में एडमिशन की भी चिंता है. कॉलेजों ने बताया कि बैठक बगैर प्रोस्पेक्टस आदि पर अनिर्णय की स्थिति है. ऐसे में कब प्रोस्पेक्टस छपेगा, कब बिकेगा और कब एडमिशन होगा.
