चक्रधरपुर में श्रद्धांजलि अर्पित करते विधायक शशिभूषण सामड व समाज के लोग.

नोवामुंडी में लाको बोदरा जयंती समारोह में उपस्थित डेबाराम तुबिद व अन्य. विकास के लिए हासा-भाषा का होना जरूरी नोवामुंडी : टिस्को माइंस के कोड़ता से विस्थापित गीतिलोर गांव में सोमवार को वारंग क्षितिलिपि के जनक लाको बोदरा की जयंती मनायी गयी. इस दौरान लाको बोदरा की तसवीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी. […]

नोवामुंडी में लाको बोदरा जयंती समारोह में उपस्थित डेबाराम तुबिद व अन्य.

विकास के लिए हासा-भाषा का होना जरूरी
नोवामुंडी : टिस्को माइंस के कोड़ता से विस्थापित गीतिलोर गांव में सोमवार को वारंग क्षितिलिपि के जनक लाको बोदरा की जयंती मनायी गयी. इस दौरान लाको बोदरा की तसवीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी. सभा में जमीन बचाओ समन्वय समिति के संयोजक डेबाराम तुबिद ने कहा कि आदिवासियों के सर्वांगीण विकास के लिए अपनी हासा-भाषा का होना जरूरी है. इसके लिए वारंग क्षिति लिपि बनाकर लाको बोदरा ने हो आदिवासियों को अपनी भाषा की पहचान दिलायी है.
अब प्राथमिक विद्यालय से हो भाषा में पढ़ाई शुरू करने की जरूरत है. मौके पर ओमोन महिला संगठन की अंबिका दास, पूर्व मुखिया रमेश तिरिया, जामदार कैरम, ग्रामीण मुंडा जयराम बारजो, सुरेश पुरती, शांति तिरिया आदि उपस्थित थे.
सभ्यता-संस्कृति ही आदिवासियों की पहचान

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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