चिरिया. भाई से करायी पत्नी की शादी, फिर ले आया घर
चिरिया : मनोहरपुर प्रखंड के चिरिया पंचायत के बिनुंवा गांव में वार्ड संख्या 5 के वार्ड सदस्य को ग्राम सभा ने गांव से निष्कासित की चेतावनी दी है. अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करते हुए अपने चचेरे भाई को जिम्मा देने के आरोप में वार्ड सदस्य को उक्त चेतावनी दी गयी है.
क्या है मामला
करीब एक वर्ष पूर्व वार्ड सदस्य चंद्रमोहन चेरोवा द्वारा अपनी पत्नी पर अपने चचेरे भाई मिथुन चेरोवा के साथ नाजायज संबंध का आरोप लगाते हुए छोड़ दिया गया था. साथ ही पत्नी की चचेरे भाई मिथुन के साथ शादी करा दी. इस बाबत चंद्रमोहन ने अपने घर में पंचो की मौजूदगी में अपनी पत्नी के साथ बहू जैसा संबंध रखने की बात कही थी.
लेकिन एक वर्ष बाद चंद्रमोहन ने फिर से अपने चचेरे भाई मिथुन के घर से पत्नी को अपने घर ले आया. ग्रामीणों को इसकी जानकारी होने पर वे आक्रोशित हो गये. मामले को लेकर रविवार को ग्रामसभा बैठी. इस दौरान ग्रामीणों ने चंद्रमोहन को सभा में बुलाया, जहां ग्रामसभा ने फैसाला सुनाया कि चंद्रमोहन अपनी पत्नी को अपने साथ नहीं रख सकता है.
चंद्रमोहन को अपनी पत्नी को गांव के बाहर, उसके मायके या फिर उसके चचेरे भाई के पास छोड़कर आने को कहा गया. ऐसा नहीं करने पर चंद्रमोहन के साथ-साथ उसकी पत्नी व उनके दोनों बच्चों को गांव से निकाल दिये जाने का फरमान सुनाया गया. गांव से उनका हुक्का-पानी बंद कर करने की चेतावनी दी गयी. इसके अलावा ग्रामसभा में चंद्र मोहन को दंड स्वरूप दो क्विंटल चावल, 2 खस्सी एवं 25 किलो हड़िया का चावल आगामी एक महीने के अंदर देने को कहा गया. मौके पर ग्राम मुंडा ब्रजमोहन चेरोवा, ग्राम प्रधान अमरसिंह सिद्धु, सुबेदार समद, सनिका चेरोवा, रवि सामद, कुंजोलता मिचयारी, पार्वती लोहार समेत दर्जनों की संख्या में महिलाओं व काफी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
गांव से हुक्का-पानी बंद करने की चेतावनी
ग्रामीणों के बीच खड़ा वार्ड सदस्य चंद्रमोहन.
मेरे बच्चों को मां की जरूरत थी : चंद्रमोहन
वार्ड सदस्य चंद्रमोहन चेरोवा ने बताया कि इस बात को स्वीकार करते हैं कि हम दोषी हैं. मेरे दोनों बच्चों को उसकी मां की आवश्यकता थी. इस कारण अपनी पत्नी को वापस लेकर आया. अब उसे उसके मायके देवांवीर (सोनुवा) पहुंचा दूंगा. ग्रामसभा ने जो दंड मुझे दिया गया है, उसे एक माह के अंदर पूरा कर दूंगा.
जनप्रतिनिधि होने के बावजूद चंद्रमोहन का कृत्य माफी के लायक नहीं. दंड जरूरी है, नहीं तो दूसरे लोग भी ऐसी गलती करेंगे.
कुंजोलता मिचयारी, ग्राम सभा कोषाध्यक्ष
जनप्रतिनिधि होने के नाते चंद्रमोहन के साथ सख्ती से पेश नहीं आया गया. आदिवासियों को धन-दौलत से ज्यादा इज्जत प्यारी होती है. गांव की बेइज्जती हुई है, दंड जरूरी है.
अमरसिंह सिद्धु, ग्राम प्रधान बिनुंवा
