झींकपानी : जन सुनवाई में किसी तरह से विधि व्यवस्था भंग न हो इसको लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से पुलिस पदाधिकारी को मुस्तैद किया गया था. लगभग 7-8 हजार की भीड़ ग्रामीणों की थी. प्रशासन की ओर से चाईबासा व अन्य क्षेत्र से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. दो-दो अग्निशासक […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
झींकपानी : जन सुनवाई में किसी तरह से विधि व्यवस्था भंग न हो इसको लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से पुलिस पदाधिकारी को मुस्तैद किया गया था. लगभग 7-8 हजार की भीड़ ग्रामीणों की थी. प्रशासन की ओर से चाईबासा व अन्य क्षेत्र से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था.
दो-दो अग्निशासक वाहन पुलिस के वज्रवाहन की तैनाती की गयी थी. जगन्नाथपुर एसडीपीओ मनोज कुमार झा, झींकपानी थाना प्रभारी संजय कुमार झा व टोंटो प्रभारी बम शंकर यादव ने प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखे हुये थे. विशेषकर सदर अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार दुब मंच की देख रेख के साथ विधि व्यवस्था पर पैनी नजर रखे हुये थे.
क्षेत्र की जीवन रेखा गुमड़ा नदी में कंपनी का डस्ट दस फीट तक भर गया है. कंपनी रात 10 बजे से सुबह 4 बजे के बीच चिमनी के माध्यम से धुआं व डस्ट छोड़ती है. इसके अलावा जी ब्लॉक खदान (जहां फैक्ट्री व कॉलोनीवासियों सहित जोड़ापोखर) के कुछ क्षेत्र में जलस्रोत सूख गये हैं. उन क्षेत्रों में पेयजल की कमी हो गयी है. इसका असर कृषि पर भी पड़ रहा है.
जॉन मिरन मुंडा, मजदूर नेता
गुमड़ा नदी में डस्ट फेंकना अविलंब बंद करने व जी ब्लॉक खदान को समतल कर ग्रामीण को जमीन सौंपा जाये. कंपनी की ओर से जहां-तहां डस्ट रखने से पहाड़ों से हल्की हवा चलने पर डस्ट उड़कर लागों के घरों में घुसता है. कंपनी से जब सिंचाई के लिए पानी मांगा जाता है, तो कंपनी पानी नहीं देती है.
जनार्दन बालमुचु, ग्रामीण
प्रदूषण क्लियरेंस की आड़ में लीज का खेल नहीं चलेगा. कंपनी द्वारा रैयतों की जमीन का दोहन कर रावण राज चलाया जा रहा है. सीओ-बीडीओ व प्रशासन के राह पर कंपनी अवैध खनन कर रही है. कंपनी ने बीते 70 साल में क्षेत्र का विकास नहीं किया है. कंपनी पर ग्रामीणों को भरोसा नहीं है.
लक्ष्मी हेस्सा, मुखिया
जोड़ापोखर में एसीसी कारखाना है, लेकिन प्रबंधन ने बीते 68 साल में एक भी पौधा नहीं लगाया.