टाटा कॉलेज के केमेस्ट्री प्रोफेसर ने कहा-यहां के विद्यार्थियों को होगा लाभ
इक्वाडोर, भारत, दक्षिण कोरिया के विभिन्न विवि में संकाय सदस्य का काम कर चुके हैं
कैंसर की आर्गेनिक नैनोमेडिसिन पर किया शोघ
चाईबासा : इक्वाडोर (दक्षिणी अमेरिका) से नैनो टेक्नोलॉजी पर तीन साल तक शोघ करने के बाद टाटा कॉलेज के केमेस्ट्री प्रोफेसर डॉ ब्रजेश कुमार अपने देश लौट आये हैं. डॉ ब्रजेश ने बताया कि यूनिवर्सिडेड डी लास फुइरजास अर्मादास इएसपीइ, इक्वाडोर में उन्होंने 2 मई 2013 से 2016 तक नैनो टेक्नोलॉजी के विभिन्न विषयों पर शोध किया. इसमें नैनो कण संश्लेषण के लिए पर्यावरण के अनुकूल तकनीक, प्राकृतिक उत्पाद निकासी, शुद्धि और विश्लेषण, प्राकृतिक पॉलिमर, पेप्टाइड रसायन विज्ञान, माइक्रोवेब और अल्ट्रासाउंड कार्बनिक संश्लेषण, थीन फिल्म सोलर सेल, सेंसिग जैसे शोध शामिल है. इसके अलावा नैनो टेक्नोलॉजी से कैंसर व अन्य बीमारी की आर्गेनिक नैनोमेडिसिन पर शोघ किया.
उन्होंने कहा कि वे इक्वाडोर, भारत, दक्षिण कोरिया के विभिन्न विश्वविद्यालय में एक संकाय सदस्य के रूप में काम कर चुके हैं. उन्होंने 50 से अधिक शोघ लेख प्रकाशित किये हैं, जबकि एसीएस, आइएससीबीस, डब्ल्यूएएसइटी, आइआइइइ जैसे सोसाइटी से उनके पेटेंट हैं. डॉ ब्रजेश 25 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के एक सक्रिय समीक्षक हैं. इक्वाडोर की ओर से उन्हें तीन साल के लिए मेजर प्रोमेटेओ की उपाधि से नवाजा गया है. कॉलेज के प्राचार्य प्रो कस्तूरी बोयपाई ने उनके शोघ कार्य के लिये बधाई दी है. उन्होंने कहा कि उनके शोध का लाभ यहां के विद्यार्थियों को मिलेगा.
इक्वाडोर के विवि यहां के विवि से एमओयू को इच्छुक. डॉ ब्रजेश ने बताया कि उनके शोघ का फायदा यहां के विश्वविद्यालय को मिलेगा. इक्वाडोर इएसपीइ विश्वविद्यालय इंटर इंस्टीट्यूट एक्सीलेंस प्रोग्राम के तहत यहां के विश्वविद्यालय के साथ एमओयू को तैयार है. यहां के विश्वविद्यालय इसके लिये राजी होते हैं, तो यहां के शिक्षक व विद्यार्थियों को काफी लाभ मिलेगा.
मेजर प्रोमेटेओ की उपाधि ग्रहण करते डॉ ब्रजेश कुमार.
लकड़ी के बुरादों से पानी की सफाई पर करेंगे शोध
डॉ ब्रजेश ने बताया कि इक्वाडोर की तरह वह भारत में भी शोध करने को इच्छुक हैं. इसके लिए वे अपना लैब तैयार करेंगे. यहां नैनो टेक्नोलॉजी पर शोघ करेंगे. इसमें पेड़ के बुरादों से पानी की सफाई, आर्गेनिक नैनोमेडिसिन, नैनो टेक्नोलॉजी से आयरन ओर की पहचान समेत अन्य शामिल है. उनका मकसद प्राकृतिक वस्तुओं से प्राकृतिक समस्या का समाधान करना है.
