घर के आंगन में बनेगी कब्र

सोनुवा. आज पहुंचेगा शहीद जोसेफ लागुरी का शव चक्रधरपुर : कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद कोल्हान के जवान जोसेफ लागुरी का शव रविवार देर रात तक सोनुवा प्रखंड की देवावीर पंचायत स्थिति टेपासाई गांव नहीं पहुंचा. दिनभर शहीद के घर पर रिश्तेदार व ग्रामीण अपनी मिट्टी के लाल का इंतजार […]

सोनुवा. आज पहुंचेगा शहीद जोसेफ लागुरी का शव

चक्रधरपुर : कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद कोल्हान के जवान जोसेफ लागुरी का शव रविवार देर रात तक सोनुवा प्रखंड की देवावीर पंचायत स्थिति टेपासाई गांव नहीं पहुंचा. दिनभर शहीद के घर पर रिश्तेदार व ग्रामीण अपनी मिट्टी के लाल का इंतजार करते रहे. शहीद के परिवार का रो-रो कर बुरा हाल था. जोसेफ की शहादत की खबर मिलने के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है. शहीद की मां मालती व पत्नी कलाजुरी लागुरी का रो-रोकर बुरा हाल है. जानकारी के अनुसार जोसेफ का अंतिम संस्कार घर पर होगा. जोसेफ को दफनाने के लिए घर के बाहर कब्र खोदा गया है. परिवार के सदस्यों ने बताया कि पारंपरिक रीति-रिवाज से जोसेफ का अंतिम संस्कार होगा.
तीन अगस्त को एंबुश में पीछे से हुआ था हमला
जानकारी के अनुसार कश्मीर में तीन अगस्त को जोसेफ एंबुस में सबसे पीछे चल रहा था. इस दौरान पीछे से हुए हमले में जोसेफ का पैर टूट गया. वहीं छाती समेत शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आयी. उसे चंडीगढ़ स्थित कमांड अस्पताल में भरती कराया गया था, जहां उसकी मौत हो गयी. शहीद जोसेफ के बड़े भाई बीएसएफ जवान विक्रम लागुरी ने बताया कि घटना की खबर मिलने के बाद अपने जीजा करम सिंह बांदिया के साथ चंडीगढ़ गये थे, जहां भाई का इलाज चल रहा था. स्थिति में सुधार होता देख दो दिन पहले ही गांव टेपासाई लौटे हैं. 19 अगस्त को जोसेफ ने चंडीगढ़ अस्पताल से शाम साढ़े चार बजे अंतिम सांस ली.
चक्रधरपुर में रह कर जोसेफ ने की थी पढ़ाई
शहीद जोसेफ ने प्रारंभिक पढ़ाई अपने गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय टेपासाई से की. इसके बाद चक्रधरपुर कारमेल स्कूल में रह कर मैट्रिक पास की. जेएलएन कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में बहाली हो गयी. 18 वर्ष पूरा होते ही जोसेफ को नौकरी मिल गयी थी.
हमेशा एंबुस में आगे रहता था जोसेफ : विक्रम लागुरी
94 बीएन बीएसएफ के जवान विक्रम लागुरी ने बताया कि जोसेफ फौज में पहले भरती हुआ था. इसके बाद मेरी नौकरी बीएसएफ में हुई. घर की हालात ठीक नहीं थी. जोसेफ बचपन से ही मेहनती था. बड़ा परिवार होने के कारण कमाने के लिए घर के बाहर जाना पड़ा. दोनों भाई की नौकरी फौज में होने के बाद घर की स्थिति में काफी सुधार आया. उसका भाई देश के लिए शहीद हो गया. जब जोसेफ तीस दिनों की छुट्टी पर आया था. तब वह भी घर पर था. हम दोनों के बीच काफी बातचीत होती थी. एंबुस में जोसेफ गाइड बन कर हमेशा आगे चलता था. जोसेफ बताया था कि कश्मीर में स्थिति ठीक नहीं है. जाने के बाद एंबुस में वह पीछे चलेगा. वह एंबुस में पीछे चल रहा था और घटना घट गयी.
आठ भाई-बहनों में पांचवें नंबर पर था जोसेफ
शहीद जोसेफ लागुरी अपने आठ भाई-बहनों में पांचवें नंबर पर था. विक्रम लागुरी, शंकर लागुरी, तुराम लागुरी व अमरनाथ लागुरी चार भाई हैं, जबकि मोनिका लागुरी, नीमी लागुरी, अनिमा लागुरी तीन बहनें हैं. जोसेफ से छोटा भाई तुराम लागुरी जेएलएन कॉलेज चक्रधरपुर में बीए पार्ट वन में और अमरनाथ लागुरी आरपीएफ कॉलेज में इंटर की पढ़ाई कर रहा है. तीनों बहन की शादी हो चुकी है. पिता मातवा लागुरी पेशे से किसान, जबकि मां मालती लागुरी गृहिणी हैं.
शहीद बेटे के इंतजार में घर के बाहर बैठे पिता,मां व भाई.
दोनों बेटों को फौज में भेजुंगा : मातवा
शहीद जोसेफ के पिता मातवा लागुरी व भाई बीएसएफ जवान विक्रम लागुरी ने कहा कि जोसेफ का शव लाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है. विक्रम ने कहा कि शव लाने छोटा भाई शंकर लागुरी व जीजा करम सिंह बांदिया चंडीगढ़ गये हैं. कुछ जानकारी नहीं मिल पा रही है. घरवालों को विभाग सही सूचना तक नहीं देता. इस कारण परेशानी और बढ़ गयी है. पिता मातवा लागुरी ने कहा कि एक बेटा देश के लिए शहीद हुआ है. जोसेफ के भाई तुराम व अमरनाथ देश की रक्षा के लिए फौज में जाने को तैयार हैं. मैं उन्हें भी देश की रक्षा के लिए फौज में भेजुंगा.
शहीद जोसेफ लागुरी को सीएम ने दी श्रद्धांजलि
गोइलकेरा/सोनुवा. कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकी हमले में शहीद हुए सोनुवा प्रखंड के टेपासाई गांव के जवान जोसेफ लागुरी की शहादत पर सीएम ने गुदड़ी के कार्यक्रम में मौन धारण करते हुए सामूहिक रूप से शहीद को श्रद्धांजलि दी. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें जोसेफ की बहादुरी पर गर्व है. आजादी के पहले से ही यहां की धरती वीरों की भूमि रही है. बिरसा मुुंडा से लेकर जोसेफ जैसे लोगों को इस धरती ने पैदा किया है. उसकी शहादत बेकार नहीं जायेगी.
घर के बाहर दफन किया जायेगा शहीद को.
मई में छुट्टी में लेकर घर आया था जोसेफ
मई 2016 में जोसेफ मसांत पर्व पर तीस दिनों की छुट्टी में घर टेपासाई आया था. जोसेफ मिलनसार व्यक्ति था. गांव में ही 2014 में कलाजुरी लागुरी से उसकी शादी हुई. शहीद जोसेफ का डेढ़ साल की एक बेटी है, जिसका नाम एलडी क्रुज है. जोसेफ ने अगस्त में आने की बात कही थी.
शिबू व हेमंत सोरेन ने जताया शोक
झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन और प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने कश्मीर के कुपवाड़ा में शहीद हुए चाईबासा के जोसेफ लागुरी के प्रति संवेदना व्यक्त की है़ झामुमो नेताओें ने कहा के पूरे झारखंड को इस वीर सपूत पर नाज है़ पूरा झामुमो परिवार शहीद के परिजनों के दु:ख के साथ खड़ा है़ पूरी पार्टी वीर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करती है़
भाई के शहादत के अगले दिन बहन ने खोया चार वर्षीय पुत्र
जोसेफ लागुरी के शहादत के अगले दिन 20 अगस्त की शाम जोसेफ की बड़ी बहन मोनिका के चार वर्षीय पुत्र की मौत बीमारी से हो गयी. बड़ी बहन सोनुवा प्रखंड के बुरूडीह गांव में रहती है. भाई के बाद बेटे की मौत से मोनिका सदमे में है. मोनिका के बेटा का नाम भी जोसेफ था.
बेटी के साथ शहीद की पत्नी

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