चाईबासा : शिक्षा का अधिकार (आरटीइ) के प्रति लोगों में जागरुकता अति आवश्यक है. आरटीइ अधिनियम इसलिए लाया गया है ताकि 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को सुरक्षा एवं संरक्षण मिल सके. झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन कर बच्चों को उनका अधिकार दिलाने की पहल की गयी है.
ये बातें बुधवार को झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष रूपलक्ष्मी मुंडा ने कही. स्कॉट विद्यालय में शिक्षकों के बीच बाल अधिकार पर प्रमंडल स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला में डीइओ भलेरियन तिर्की ने कहा कि किसी भी कमेटी का गठन अधिकार दिलाने के लिए ही होता है. आयोग बच्चों के अधिकार को संरक्षण देती है. आयोग को बाल अधिकारों की उपेक्षा और उल्लंघन के मामलों की शिकायतों पर स्वत: संज्ञान लेने और जांच कराने का अधिकार है.
डीडीसी बाल किशुन मुंडा ने कहा कि लोगों में जागरुकता हो तो बाल अधिकारों के हनन पर अंकुश लगाया जा सकता है. कार्यशाला में आयोग के सदस्य सुनील कुमार, रंजना चौधरी, डीएसई बीना कुमारी, चक्रधरपुर एसडीपीओ आलोक प्रियदर्शी एवं बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित थे.
