जब लग खालसा रहे निआरा, तब लग तेज दिखे मैं सारा

चाईबासा : सिखों के दसवें धर्मगुरु गुरु गोविंद सिंह की 347वीं जयंती मंगलवार को उत्साह व श्रद्धाभाव से मनायी गयी. पांच जनवरी को गुरुद्वारा साहिब में शुरू हुआ श्री अखंड पाठ मंगलवार को समाप्त हुआ. जमशेदपुर से आये अमरीक सिंह तथा उनके साथियों ने अखंड पाठ पूरा किया. जमशेदपुर से भाई यशपाल छाबड़ा ने शब्द […]

चाईबासा : सिखों के दसवें धर्मगुरु गुरु गोविंद सिंह की 347वीं जयंती मंगलवार को उत्साह व श्रद्धाभाव से मनायी गयी. पांच जनवरी को गुरुद्वारा साहिब में शुरू हुआ श्री अखंड पाठ मंगलवार को समाप्त हुआ. जमशेदपुर से आये अमरीक सिंह तथा उनके साथियों ने अखंड पाठ पूरा किया.

जमशेदपुर से भाई यशपाल छाबड़ा ने शब्द कीर्तन किया. जशपाल सिंह तथा गुरप्रीत सिंह ने तबले पर उनका साथ दिया. गुरु पर्व में झींकपानी, केंदपोसी, राजखरसावां, केशरगड़िया की समूह साथ संगत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हाजरियां भरीं. छोटे बच्चों ने शब्द कीर्तन किया.

इस मौके पर लोगों के सुख व समृद्धि की कामना के लिए अरदास की गयी. इस मौके पर बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग उपस्थित थे. चाईबासा के ग्रंथी सुखवंत सिंह एवं श्री गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष गुरमुख सिंह खोखर ने साध संगत को प्रकाश उत्सव की बधाई दी.

कार्यक्रम को सफल बनाने में सरिंदर सिंह, जशपाल सिंह, बलजीत सिंह खोखर, जशबीर सिंह, सत्पाल सिंह, हरजित सिंह, अमरिक सिंह, कृपाल सिंह, सुरजीत सिंह, रौनक सिंह खोखर, मनजीत सिंह का योगदान रहा.

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