चाईबासा : रंगकर्मी सफदर हाशमी को शहर की नाटक संस्था सृष्टि व इप्टा की ओर से अलग-अलग सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी गयी. सृष्टि की ओर से आयोजित सभा में संयोजक प्रकाश कुमार गुप्ता ने सफदर हासमी को एक कम्युनिस्ट नाटककार, कलाकार, निर्देशक, गीतकार और कलाविद बताया.
हासमी को नुक्कड़ नाटक के साथ उनके जुड़ाव के लिये जाना जाता है. सफदर जन नाटक मंच और दिल्ली में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक सदस्य थे. जन नाटक मंच की नीव 1973 में रखी गयी थी.
यह संस्था इप्टा से अलग होकर बनी था. उनकी अहम नाटकों में मशीन, गांव से शहर तक, हत्यारे, अपहरण भाइचोर का, तीन करोड़, औरत, डीटीसी की धांधली आदि प्रमुख है. मौके पर बसंत कारवा, अभिजीत डे, कुणाल मिश्र, आकाश कुमार यादव, धनंजय कुमार साव, ओम कारवा, अजरुन कारवा, सुमन बिदाडी, अजय झा, पुनम जामुदा सुप्रिया दास उपस्थित थे.
वहीं इप्टा की ओर से आयोजित श्रद्धांजलि सभा में ताराचंद्र शर्मा, संजय चौधरी, कैशर परवेज, कृष्ण कुमार जयसवाल, राजेश कुमार, शिवशंकर राम, शीत सुगंधिनी बागे, राजू प्रजापति, नरेश राम, संजय प्रसाद, रोविंस कुमार, सैरभ, कृष्णानु, सुजन, अंगद आदि शामिल थे.
