गुरु गोविंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए सिख धर्म और खालसा पंथ की स्थापना की : प्रताप
चाईबासा : चाईबासा की गुरु सिंह सभा की ओर से सोमवार को गुरुद्वारा में गुरु गोविंद सिंह का प्रकाशोत्सव मनाया गया. गुरुद्वारा के प्रधान गुरमुख सिंह खोखर ने कहा कि जिस तरह हम अपने जीवन में धन कमाने पर ध्यान देते हैं. धन अर्जित कर संभाल कर रखते हैं, ताकि हमें वक्त पर काम आता रहे. उसी प्रकार बेहतर भविष्य के लिए वाहेगुरु के नाम का सिमरन करना चाहिए. हमारी जिंदगी का लक्ष्य वाहेगुरु के नाम का सिमरन और गऊ-गरीब की सेवा होनी चाहिए.
गुरु गोविंद सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. बलजीत सिंह ने गुरु गोविंद सिंह की जीवनी पर प्रकाश डाला. सभा में नवनीत सिंह खोखर, रौनक सिंह खोखर, जसपाल सिंह भमराह, कृपाल सिंह जुजुवा, जसवीर, हरजीत सिंह, सुरिंदर पाल सिंह वालिया, जसवीर सिंह मारवाह समेत केशरगाड़िया, झींकपानी, राजखरसावां व केंदपोसी के सिख संगत ने भाग लिया.
बच्चों ने किया कविता पाठ
इसके पूर्व स्त्री सत्संग सभा ने 22 दिसंबर को प्रभात फेरी निकाली. 23 दिसंबर को अखंड पाठ शुरू हुई, जिसे जमशदेपुर के ज्ञानी अमरीक सिंह के जत्थे ने किया. इसकी समाप्ति 25 दिसंबर को हुई. स्त्री सत्संग सभा ने शब्द कीर्तन किया. छोटे-छोटे बच्चे-बच्चियों ने कविता पाठ किया. इसके बाद गुरु का लंगर हुआ. शाम छह बजे से आठ बजे तक गुरुद्वारा साहिब में स्त्री सत्संग सभा ने कीर्तन किया. जमशेदपुर के ग्रंथी प्रताप सिंह ने गुरु गोविंद सिंह जी की जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए सिख धर्म और खालसा पंथ की स्थापना की थी.
