बिक्रमगंज : बिक्रमगंज के थाना चौक के पास वर्षों से जारी बूचड़खानों से आज भी पशुओं के अवशेष निकल रहे है. रात के अंधेरे में पशुओं की तस्करी शुरू होती है. लेकिन पांच सौ गज की दूरी पर स्थित थाने को यह नजर नहीं आता है.
थाना से जब पूछा जाता है तो कहते हैं कि बूचड़खानों को बंद हुए हफ्ते गुजर गये. थाना प्रभारी अकरम अंसारी तो पशुओं के बूचड़खाने चलने की बात को सिरे से खारिज करते है और कहते हैं कि प्रशासन के लगाये सील आज भी जस के तस है. कौन कहता है कत्लेआम जारी है. भाजपा नेता घनश्याम सिंह कहते हैं कि अब सूबे में एनडीए की सरकार है. अवैध पशुवधशालाएं किसी भी कीमत पर बरदाश्त नहीं होगी. चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े. इस पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी नीरज कुमार सिंह कहते हैं कि पुलिस का काम है ऐसे जगहों की रूटीन चेकिंग कराये जो हो रहा है. जब स्थिति इतनी कंट्रोल में है तो फिर कुछ लोग बिगाड़ने पर क्यो तुले हैं.
अगर पुलिस पर शक है तो सबूत उपलब्ध कराएं जिस पर कार्रवाई होगी. लेकिन, नगर के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि जब पशु कटते नहीं है, तो आखिर जाते कहां है? प्रशासन को यह पता नहीं है क्या कि राज्य सरकार ने बछड़ों को राजकीय पशु घोषित किया है जिसे अन्य राज्यों में बेचने और ले जाने पर पाबंदी है? फिर झुंड के झुंड बंधे पशु आखिर गायब कैसे हो जाते है. और शायद इन प्रश्नों का जवाब प्रशासन के पास है ही नहीं.
