जीवन के प्रथम गुरु होते हैं माता-पिता

नववर्ष पर तुलसी पूजन व मातृ-पितृ पूजन समारोह का आयोजन

सिमडेगा. सरना मंदिर परिसर में नववर्ष पर तुलसी पूजन एवं मातृ-पितृ पूजन समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य नववर्ष का शुभारंभ भारतीय संस्कृति के मूल संस्कारों माता-पिता का सम्मान तथा प्रकृति पूजन के साथ करना था. मौके पर सर्वप्रथम तुलसी मां का विधिवत पूजा की गयी. उपस्थित श्रद्धालुओं ने तुलसी को जल अर्पित कर आरती की और परिवार, समाज व राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की. तत्पश्चात मातृ-पितृ पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने अपने माता-पिता के चरण धोकर, तिलक लगा कर व पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया. कार्यक्रम में विद्या देवी, निराला देवी, आरती देवी, संतोषी देवी, पुतुल देवी, सुगंती देवी, बेलावती, शिवानी, दिनेश भारती, प्रदीप, सहदेव, सुरेश गोप, मंगल बड़ाइक, विनय शंकर नंद, कृष्ण पाठक व राहुल कुमार समेत अन्य अभिभावक उपस्थित थे. वैभव, ओम, अतुलित एवं भूमि आदि विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ पूजन में भाग लेकर सभी का मन मोह लिया. वक्ताओं ने कहा कि मातृ-पितृ पूजन बच्चों में संस्कार, कृतज्ञता व अनुशासन का विकास करता है. माता-पिता ही जीवन के प्रथम गुरु होते हैं. उनके आशीर्वाद से जीवन की हर राह सरल होती है. वहीं तुलसी पूजन हमें प्रकृति के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन व सात्विक जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा देता है. कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.

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