आस्था और ऐतिहासिक विरासत का प्रमुख केंद्र है केतुंगाधाम बूढ़ा गोरक्ष शिव मंदिर

सिमडेगा जिले के बानो में स्थित केतुंगाधाम शिव मंदिर ऐतिहासिक विरासत का प्रमुख केंद्र हैं, सावन के पवित्र माह के शुरू होते ही यहां शिव भक्तों और श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

बानो: जिले के बानो प्रखंड से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर मालगो और देव नदी के संगम पर स्थित केतुंगाधाम बूढ़ा गोरक्ष शिव मंदिर आस्था, आध्यात्म और ऐतिहासिक विरासत का प्रमुख केंद्र है. यहां पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन सावन माह में मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. पूरे सावन महीने चलने वाले मेले में झारखंड के अलावा ओड़िशा, बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. जिला प्रशासन ने केतुंगाधाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल की है.

तत्कालीन उपायुक्त सुशांत गौरव के प्रयासों से मंदिर से नदी तट तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शेड का निर्माण कराया गया है. इसके अलावा प्रवेश द्वार और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की गयी हैं.

केतुंगाधाम का इतिहास और पौराणिक महत्व काफी समृद्ध माना जाता है. पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर को पंजीकृत किया है. स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर की स्थापना श्रीगंकेतु राजा के शासनकाल में हुई थी, जिसके कारण इसका नाम केतुंगाधाम पड़ा. बाद में बरसलोया, केतुंगा, बानो, जलडेगा और लचरागढ़ के ग्रामीणों के सहयोग से यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया.

स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, कलिंग युद्ध के बाद लौटते समय सम्राट अशोक ने यहां कुछ समय विश्राम किया था. इस दौरान उन्होंने एक बौद्ध मंदिर की स्थापना करायी थी. उस मंदिर की खंडित मूर्तियां आज भी रानीटांड़ स्थित खेत में मौजूद हैं, जहां लोग पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. हालांकि खुले में रखे होने और उचित संरक्षण के अभाव में ये ऐतिहासिक मूर्तियां धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रही हैं. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इन धरोहरों के संरक्षण की मांग की है.

मान्यता है कि भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान इसी मार्ग से रामरेखा धाम गये थे. देव नदी की चट्टानों पर उनके पदचिह्न आज भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं. इन पदचिह्नों के दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं.

आवागमन और ठहरने की सुविधा

केतुंगाधाम शिव मंदिर तक पहुंचने के लिए कोलेबिरा प्रखंड के लचरागढ़ तथा बानो प्रखंड से सोय-कोनसोदे होते हुए सड़क मार्ग उपलब्ध है. मंदिर लचरागढ़ से लगभग पांच किलोमीटर और बानो प्रखंड मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में निशुल्क ठहरने की व्यवस्था भी की गयी है. सावन की अंतिम सोमवारी पर यहां विशाल भंडारा का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के गांवों के लोग बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं.


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By Prabhat khabar news desk

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