निधन से कुछ महीने पहले तक गांव-गांव पहुंच रही थीं विमला प्रधान, टिकरा के ग्रामीणों की सुनी थी बिजली-सड़क की समस्या

पूर्व मंत्री विमला प्रधान के निधन के बाद सिमडेगा के टिकरा गांव के लोग उनकी जनसेवा को याद कर रहे हैं. उन्होंने ग्रामीणों की बिजली, सड़क और पेयजल की समस्याएं सुनी थीं और अधिकारियों से समाधान का आश्वासन दिलाया था.

रांची/सिमडेगा. पूर्व मंत्री विमला प्रधान के निधन के बाद उनके राजनीतिक सफर के साथ क्षेत्र के लोगों से उनका जुड़ाव भी याद किया जा रहा है. निधन से कुछ महीने पहले मई 2026 में वह सिमडेगा के जलडेगा प्रखंड के दूरस्थ टिकरा गांव पहुंची थीं. वहां उन्होंने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनी थीं. ग्रामीणों ने गांव में बिजली, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की जानकारी उन्हें दी थी.

आजादी के बाद से बिजली नहीं पहुंचने की ग्रामीणों ने बतायी थी समस्या

टिनगिना पंचायत का टिकरा गांव जंगलों से घिरा हुआ है. ग्रामीणों ने विमला प्रधान को बताया था कि गांव में आजादी के बाद से अब तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है. बिजली नहीं होने से जंगली हाथियों की समस्या के बीच ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है.

ग्रामीणों ने बताया था कि बांसजोर की ओर से सड़क निर्माण हुआ है, लेकिन जलडेगा मुख्यालय से गांव को जोड़ने वाली सड़क अब तक नहीं बन पायी है. इससे आवागमन में परेशानी होती है. पेयजल की समस्या भी ग्रामीणों ने उनके सामने रखी थी. जल जीवन मिशन के तहत कुछ स्थानों पर सुविधा पहुंचने के बावजूद कई घर इससे वंचित होने की बात कही गयी थी.

मौके से बीडीओ को फोन कर समस्याओं से कराया था अवगत

ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद विमला प्रधान ने टिकरा गांव की स्थिति को चिंताजनक बताया था. उन्होंने मौके से ही जलडेगा के बीडीओ डॉ. प्रवीण कुमार से फोन पर बात कर गांव की समस्याओं से अवगत कराया था.

बीडीओ ने गांव का सर्वेक्षण कर मूलभूत सुविधाओं की कमी दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था. बिजली की समस्या के समाधान के लिए सोलर पैनल के माध्यम से सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास की भी बात कही गयी थी.

सामाजिक कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर

विमला प्रधान ने सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी. बाद में भाजपा से जुड़कर सक्रिय राजनीति में आयीं और सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र का दो बार प्रतिनिधित्व किया. वह झारखंड सरकार में मंत्री भी रहीं. राजनीति से सक्रिय रूप से दूर होने के बाद भी सिमडेगा से उनका जुड़ाव बना रहा और वह स्थानीय तथा ग्रामीण समस्याओं को लेकर सक्रिय नजर आती थीं.

टिकरा गांव का दौरा उनके इसी जुड़ाव की एक तस्वीर पेश करता है, जब उन्होंने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी बुनियादी समस्याएं सुनी थीं. उनके निधन के बाद सिमडेगा के लोगों के बीच उनके सार्वजनिक जीवन और क्षेत्र से जुड़े सरोकारों की चर्चा हो रही है.

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By वैभव विक्रम

वैभव विक्रम प्रभात खबर डिजिटल में डिजिटल पत्रकार हैं. पिछले पांच वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और झारखंड से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों, खेल, शिक्षा, लाइफस्टाइल और धर्म से जुड़े विषयों पर काम कर रहे हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के लिए जिलों की खबरें कवर कर रहे हैं.

इससे पहले वर्ष 2023-24 में उन्होंने प्रभात खबर के खेल डेस्क के लिए खबरें लिखीं. वर्ष 2024-26 के दौरान वे न्यूज11 भारत के साथ झारखंड की खबरों पर काम कर चुके हैं. स्थानीय घटनाक्रम और जमीनी मुद्दों को सरल, स्पष्ट और प्रभावी तरीके से डिजिटल पाठकों तक पहुंचाना उनकी पत्रकारिता का प्रमुख हिस्सा रहा है.

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