शिक्षा संघर्ष का सबसे प्रभावी हथियार : गणेश मांझी

गोंडवाना समर कैंप सह युवा सम्मेलन शुरू, 500 से अधिक प्रतिभागी हो रहे शामिल

गोंडवाना समर कैंप सह युवा सम्मेलन शुरू, 500 से अधिक प्रतिभागी हो रहे शामिल

सिमडेगा. कुरडेग प्रखंड के आसनबेड़ा अंबाटोली गांव में सोमवार से पांच दिवसीय 12वें गोंडवाना समर कैंप सह युवा सम्मेलन शुरू हुआ. यह आयोजन गोंडवाना आदिवासी कल्याण व विकास मंच, गोंडवाना छात्र संघ सिमडेगा व जागृति समिति आसनबेड़ा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है. कैंप का उद्देश्य समाज के बच्चों व युवाओं में नेतृत्व क्षमता, शारीरिक व मानसिक विकास, सामाजिक चेतना तथा शैक्षणिक जागरूकता को बढ़ावा देना है. समर कैंप का उद्घाटन डॉ गणेश मांझी ने ध्वजारोहण कर किया. कार्यक्रम में भाग लेने वाले बच्चों व युवाओं ने सात अलग-अलग टीमों में संगठित होकर आकर्षक परेड और मॉक ड्रिल का प्रदर्शन किया, जिससे अनुशासन, एकता व उत्साह का परिचय मिला. शिविर पांच जून तक आयोजित होगा तथा इसका समापन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ किया जायेगा. कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक गोंडी रीति-रिवाजों के अनुसार हुई. भूमक पहान की अगुवाई में हीराधर मांझी व देवी सिंह मांझी ने छह कुल देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की. मुख्य अतिथि डॉ गणेश मांझी ने कहा कि समाज का निर्माण व परिवर्तन की शुरुआत शिक्षा से होती है. उन्होंने डॉ भीमराव अंबेडकर के मूल मंत्र शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो को युवाओं के जीवन का मार्गदर्शक बताया. कहा कि वर्तमान समय में संघर्ष का सबसे प्रभावी हथियार शिक्षा है. दिल्ली में मनोविज्ञान की शिक्षिका रजनी मांझी ने कहा कि समाज को सशक्त व जागरूक बनाने के लिए युवाओं का शिक्षित होना जरूरी है. कहा कि तकनीकी विकास के इस युग में केवल पुस्तक ज्ञान ही नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाओं की समझ और तकनीकी दक्षता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. देवी सिंह मांझी ने कहा कि किसी समाज का विकास उसकी सोच पर निर्भर करता है. यदि समाज की सोच सकारात्मक, प्रगतिशील और दूरदर्शी हो, तो विकास की गति तीव्र हो जाती है. गोंडवाना विकास मंच के संरक्षक कमलेश्वर मांझी, जागृति समिति के अध्यक्ष जगदीश मांझी, स्थानीय मुखिया सुनीता देवी, हीराधर मांझी समेत अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किये. संचालन गोंडवाना विकास मंच के अनुज बेसरा ने किया. शिविर में झारखंड के अलावा मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों से आये 500 प्रतिभागी शामिल हुए हैं. समर कैंप के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों, खेल प्रतियोगिताओं, समूह चर्चाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समग्र विकास का अवसर मिलेगा. आयोजन को सफल बनाने में जयनंदन मांझी, दीपक मांझी, भुनेश्वर बेसरा, उमेश बेसरा, हीराधर मांझी, त्रिभुवन भोय, नंदकिशोर भोय, महावीर बेसरा, जगदीश मांझी, सुखराम मांझी, गायत्री बेसरा, तरुण मांझी आदि अहम भूमिका निभा रहे हैं.

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