सिमडेगा. ठेठईटांगर प्रखंड के केरया पंचायत के चीरोबेड़ा एवं देवबहार में जिला परिषद सिमडेगा द्वारा डीप बोरिंग एवं जालमीनार की निर्माण करायी गयी थी. लाखों की लागत से बने इन जलमीनारों से आज तक किसी भी ग्रामीण के घर एक बूंद पानी नहीं पहुंच पाया. नतीजतन ग्रामीण आज भी कुआं और डांड़ी के पानी पर निर्भर हैं.ग्रामीणों का आरोप है कि यह स्थिति पूरी तरह संवेदक की लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली का परिणाम है. इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने ठेठईटांगर के जिला परिषद सदस्य कृष्णा बड़ाईक से शिकायत की. शिकायत मिलते ही जिला परिषद अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग एवं उपाध्यक्ष सोनी पैकरा, जिला परिषद सदस्य कृष्णा बड़ाइक के साथ डीप बोरिंग और जालमीनार का स्थलीय निरीक्षण किया.निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि बोरिंग के समय पानी नहीं निकलने पर संवेदक ने तकनीकी नियमों को दरकिनार करते हुए कुएं का पानी बोरिंग में भर दिया और यह दावा किया कि इससे जल स्तर बढ़ेगा. इसके बाद कुछ समय के लिए जलमीनार में पानी चढ़ायी गयी, लेकिन उसके बाद आज तक दोबारा पानी नहीं आया. परिणामस्वरूप जलमीनार सिर्फ दिखावे की वस्तु बनकर रह गयी है. ग्रामीणों की पीड़ा और शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बाद जिला परिषद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही वहां नयी बोरिंग करायी जायेगी. साथ ही पहले किये गये कार्यों की गहन जांच कर सरकारी राशि के दुरुपयोग की जिम्मेदारी तय की जायेगी.
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