पर्यटन क्षेत्र के बजाय तीर्थ क्षेत्र घोषित हो धाम : कृष्ण चैतन्य

श्रीरामरेखा धाम को पर्यटन स्थल घोषित करने के विरोध में सनातन समाज ने निकाला आक्रोश मार्च

श्रीरामरेखा धाम को पर्यटन स्थल घोषित करने के विरोध में सनातन समाज ने निकाला आक्रोश मार्च सिमडेगा. सिमडेगा के ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व वाले श्रीरामरेखा धाम को पर्यटन स्थल घोषित किये जाने के विरोध में मंगलवार को सनातन समाज का आक्रोश सामने आया. हजारों सनातनी श्रद्धालुओं ने शहर में आक्रोश मार्च निकालते हुए पैदल यात्रा की और नारेबाजी करते हुए धाम को पर्यटन क्षेत्र के बजाय तीर्थ क्षेत्र घोषित करने की मांग की. संत समाज के प्रांत अध्यक्ष कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि सनातन समाज की आस्था को ठेस पहुंचाने का अधिकार किसी को नहीं है. उन्होंने कहा कि युगों से भगवान श्रीराम की आदर्श परंपरा को मानने वाले वनवासी व सनातनी समाज के लिए श्रीरामरेखा धाम श्रद्धा व आस्था का केंद्र रहा है. ऐसे पवित्र स्थल को पर्यटन क्षेत्र घोषित करना धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार राम जन्मभूमि को तीर्थ क्षेत्र के रूप में पहचान मिली है, उसी प्रकार श्रीरामरेखा धाम को भी तीर्थ क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए. भगवान श्रीराम के वनगमन काल से जुड़े इस पवित्र स्थल को पर्यटन क्षेत्र घोषित किये जाने के विरोध में सिमडेगा, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ से हजारों श्रद्धालु गांधी मैदान में जुटे. यहां से लोगों ने चिलचिलाती धूप के बीच समाहरणालय तक विशाल आक्रोश मार्च निकाला. रैली के दौरान श्रीरामरेखा धाम को तीर्थ क्षेत्र घोषित करो जैसे नारे लगाये गये. प्रशासन ने भीड़ को समाहरणालय गेट के पास रोक दिया, जिसके बाद संतों की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन एसडीओ को पर्यटन मंत्री के नाम सौंपा. सनातन समाज के कौशल राज सिंह देव ने कहा कि श्रीरामरेखा धाम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. यदि इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया, तो यहां ऐसे लोगों का आगमन बढ़ेगा, जो धार्मिक मर्यादाओं का पालन नहीं करेंगे, जिससे धाम की पवित्रता प्रभावित हो सकती है. उन्होंने प्रशासन से पर्यटन क्षेत्र घोषित करने के फैसले को वापस लेकर इसे तीर्थ क्षेत्र घोषित करने की मांग की. वहीं डॉ पद्मराज ने कहा कि पर्यटन और तीर्थ दोनों शब्दों के अर्थ अलग-अलग हैं. पर्यटन का उद्देश्य मनोरंजन और मौज-मस्ती होता है, जबकि तीर्थ व्यक्ति को आध्यात्मिक चेतना, आत्मशुद्धि और धर्म से जोड़ता है. इसलिए श्रीरामरेखा धाम को तीर्थ क्षेत्र के रूप में ही मान्यता दी जानी चाहिए. कार्यक्रम में जिले की विभिन्न मंदिर समितियों के सदस्य, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और हजारों सनातनी श्रद्धालु मौजूद थे.

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