सिमडेगा: सिमडेगा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवनशैली और ग्रामीण आजीविका की अवधारणाओं को समझने के उद्देश्य से शनिवार को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम), रांची के 26 छात्र-छात्राओं ने सिमडेगा हेरिटेज सह म्यूजियम का शैक्षणिक भ्रमण किया. दल का नेतृत्व आइआइएम रांची के फैसिलिटेटर विकास पाठे और जॉर्ज जोसेफ ने किया. इस दौरान जेएसएलपीएस के बीपीओ-ईपी मुकेश पांडे भी मौजूद थे.
विद्यार्थियों ने जानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने म्यूजियम में संरक्षित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का बारीकी से अवलोकन किया. यहां सिमडेगा की स्थानीय संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और जीवनशैली से जुड़ी विभिन्न वस्तुओं के अलावा करीब 100 वर्षों के इतिहास को समेटे पुराने उपकरण, यंत्र, फर्नीचर और दैनिक उपयोग की पारंपरिक सामग्रियां संरक्षित हैं. द्वितीय विश्व युद्ध के काल से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्य और वस्तुएं भी विद्यार्थियों के आकर्षण का केंद्र रहीं.
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म्यूजियम का संचालन करने वाली समूह की दीदियों ने विद्यार्थियों को प्रदर्शित सामग्रियों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी. उन्होंने स्थानीय रीति-रिवाज, कला, हस्तशिल्प, खान-पान और कृषि आधारित जीवनशैली से भी परिचित कराया. विद्यार्थियों ने म्यूजियम के संचालन, रख-रखाव और आगंतुक प्रबंधन की प्रक्रिया को भी समझा.
पलाश दीदी कैफे की कार्यप्रणाली जानी
विद्यार्थियों ने परिसर में संचालित पलाश दीदी कैफे का भी भ्रमण किया. यहां उन्होंने जाना कि स्थानीय संसाधनों और उत्पादों को व्यवसाय से जोड़कर ग्रामीण महिलाओं के लिए आय और आजीविका के नये अवसर किस तरह सृजित किये जा सकते हैं. आइआइएम रांची के विद्यार्थियों ने हेरिटेज म्यूजियम और पलाश दीदी कैफे की पहल को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण उद्यमिता और आजीविका संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया.
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