सरायकेला-खरसावां : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल और नीमडीह प्रखंड के कई गांवों में शनिवार रात झुंड से बिछड़े एक जंगली हाथी ने जमकर उत्पात मचाया. हाथी ने नीमडीह के बाना, पितकी, रावताड़ा तथा चांडिल के सुखसारी, कांग्लाटांड़ और ससानटांड़ गांव में आधा दर्जन से अधिक घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचाया. कई घरों में रखा चावल भी खा गया. पूरी रात ग्रामीण दहशत में जागते रहे.
तबाही का सिलसिला कई गांवों तक पहुंचा
ग्रामीणों के अनुसार, रात करीब आठ बजे हाथी बाना गांव पहुंचा, जहां दो मिट्टी के घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया. इसके बाद वह पितकी और रावताड़ा होते हुए सुखसारी गांव पहुंचा. यहां कई घरों की दीवारें तोड़कर चार बोरा चावल खा गया. एक दुकान को भी नुकसान पहुंचाया, जिससे पास में खड़ी बाइक क्षतिग्रस्त हो गयी. ससानटांड़ में घर में रखा अनाज खा गया, जबकि कांग्लाटांड़ में एक मकान को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया. हालांकि सभी लोग समय रहते घरों से बाहर निकल गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई.
बारिश से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी
लगातार बारिश से मिट्टी के घर कमजोर हो गए हैं, जिससे हाथी आसानी से दीवारें तोड़ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर खेतों में काम करने के बाद रातभर हाथियों से बचाव के लिए पहरा देना पड़ रहा है.
वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना है कि सूचना देने के बावजूद एलिफेंट ड्राइव टीम समय पर नहीं पहुंची. ग्रामीणों ने सोलर फेंसिंग, ट्रेंच निर्माण, स्थायी एलिफेंट ट्रैकिंग टीम की तैनाती और प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है. वन विभाग ने प्रभावित गांवों का दौरा कर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है.
