Seraikela Kharsawan News : एक शिक्षक के भरोसे चल रहा उउवि मेरमजंगा

शिक्षा व्यवस्था बदहाल. दो शिक्षिकाएं राजनगर प्रखंड में प्रतिनियुक्त, पठन-पाठन प्रभावित

खरसावां.

सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड की गोमियाडीह पंचायत स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय मेरमजंगा में शिक्षकों की भारी कमी है. स्कूल का संचालन फिलहाल प्रतिनियुक्त शिक्षक बृजेश्वर कुमार द्विवेदी के भरोसे हो रहा है. कक्षा 1 से 10 तक के 116 बच्चों की पढ़ाई एक ही शिक्षक के माध्यम से करायी जा रही है. ऐसे में शिक्षण की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है. वर्ष 2018 में इस स्कूल को मध्य विद्यालय से अपग्रेड कर उत्क्रमित उच्च विद्यालय का दर्जा दिया गया था. हालांकि, कक्षा 9 की पढ़ाई 2024 से शुरू हुई है. इस वर्ष 11 विद्यार्थी पहली बार मैट्रिक की परीक्षा में शामिल होंगे. शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्ति होने पर पठन-पाठन की स्थिति में सुधार की उम्मीद है.

शिक्षिकाएं व लिपिक दूसरी जगह प्रतिनियुक्त होने से आक्रोश

सूत्रों के अनुसार, विद्यालय में पदस्थापित दो शिक्षिकाएं सेनुका राउत और सुनीता मार्डी को राजनगर प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों में प्रतिनियुक्त कर दिया गया है. यही नहीं, विद्यालय के लिपिक गौरव कुमार महतो को भी सरायकेला के केवीपीएस में भेजा गया है. इसको लेकर अभिभावकों में नाराजगी है. उन्होंने तीनों की प्रतिनियुक्ति रद्द कर मूल विद्यालय में वापस भेजने की मांग की है. पूर्व में यहां एक सहायक (पारा) शिक्षक भी कार्यरत थे, जिनका करीब पांच माह पूर्व निधन हो गया. वर्तमान में बृजेश्वर कुमार द्विवेदी ही एकमात्र शिक्षक हैं, जिनकी मूल पदस्थापना यूएमएस तोरंबा में है. वर्ष 2022 में उन्हें अस्थायी रूप से मेरमजंगा विद्यालय में भेजा गया था. वे जब भी कार्यालय कार्य से बाहर जाते हैं, तो सीनियर क्लास के विद्यार्थी ही जूनियर छात्रों को पढ़ाते हैं.

विद्यालय में चहारदीवारी नहीं

विद्यालय का संचालन फिलहाल चार कमरों के भवन में हो रहा है. पिछले वर्ष सरकार की ओर से दो नये पक्के कमरे बनाये गये, जबकि कुछ कक्षाएं एस्बेस्ट्स की झोपड़ीनुमा इमारत में चल रही हैं. विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है, हालांकि पानी और शौचालय की व्यवस्था मौजूद है. मेरमजंगा गांव कुचाई प्रखंड मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर दूर और रांची जिले की सीमा से सटा हुआ है. यह पूरा इलाका पहाड़ी और घने जंगलों से घिरा हुआ है, जिससे शिक्षकों की नियुक्ति और पठन-पाठन, दोनों में कठिनाइयां बनी हुई हैं.

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Author: AKASH

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