टाटा-पुरुलिया-धनबाद-बोकारो और आसनसोल को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग एनएच-32 शनिवार को एक बार फिर रणक्षेत्र बन गया. चांडिल के पितकी रेलवे फाटक पर शनिवार सुबह से ही भीषण जाम लगा रहा, जिससे सड़क के दोनों ओर करीब तीन-तीन किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गयीं. सैकड़ों ट्रक, बसें व छोटे वाहन तपती धूप में रेंगने को विवश हैं.
भीषण गर्मी में यात्रियों की बढ़ी मुसीबत:
इस भीषण गर्मी और उमस के बीच जाम में फंसे वाहन चालकों और यात्रियों का हाल बेहाल है. उन्हें पीने के पानी और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी जूझना पड़ रहा है. सबसे गंभीर स्थिति उन मरीजों की है जो एंबुलेंस में फंसे हैं. साथ ही स्कूली बच्चे और ड्यूटी पर जाने वाले कर्मचारी भी इस जाम के कारण घंटों परेशान रहे.
जाम में स्कूली बस भी घंटों फंस रही:
जाम का सीधा असर लोगों की जेब और रोजगार पर पड़ रहा है. समय पर कार्यस्थल न पहुंच पाने के कारण निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी कट रही है. नीमडीह से चांडिल आने वाले स्कूली बच्चों की बसें घंटों फंसी रहती हैं. जाम से बचने के लिए लंबी दूरी की बसें अब चांडिल के बजाय पटमदा-बड़ाबाजार होकर चल रही हैं. इससे यात्रियों को न केवल अधिक समय लग रहा है, बल्कि ज्यादा किराया भी चुकाना पड़ रहा है.
फाटक व ट्रेनों का दबाव, हर दिन 70 ट्रेनों की आवाजाही
जाम की मुख्य वजह चांडिल रेलवे स्टेशन से सटा पितकी रेलवे फाटक है. चांडिल-मुरी और चांडिल-आद्रा रेलखंड पर प्रतिदिन करीब 65 से 70 मालगाड़ियां और पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं. एनएच-32 पर रोजाना 3,500 से 4,000 छोटे-बड़े वाहनों का परिचालन होता है. बार-बार फाटक बंद होने से वाहनों का दबाव अचानक बढ़ जाता है और यातायात पूरी तरह ठप हो जाता है.
अधूरा ओवरब्रिज : ढाई महीने और झेलनी होगी मार
पितकी और जामडीह में लंबे समय से निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) की धीमी प्रगति इस स्थायी समस्या की जड़ है. हालांकि, राहत की बात यह है कि ओवरब्रिज के एक साइड का गर्डर लॉन्च कर दिया गया है. अधिकारियों के अनुसार, इस ओवरब्रिज को जून के अंत या जुलाई के पहले सप्ताह तक चालू कर दिया जाएगा. यानी क्षेत्र के लोगों को करीब ढाई महीने और इस समस्या से दो-चार होना पड़ेगा.
चौका-कांड्रा मार्ग पर जर्जर सड़क से ट्रेलर ब्रेकडाउन, लगा जाम
चौका. चौका-कांड्रा सड़क मार्ग स्थित चौका में जर्जर सड़क के कारण ट्रेलर बीच सड़क में ब्रेकडाउन हो गया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया. कांड्रा से चौका की ओर आ रहा ट्रेलर अचानक खराब होकर सड़क के बीचोंबीच खड़ा हो गया. सड़क की खराब हालत के कारण अन्य वाहनों के निकलने की जगह नहीं बची, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गयी. स्थिति तब और बिगड़ गई जब एक ही साइड से दोनों दिशाओं के वाहनों का आवागमन होने लगा, परिणामस्वरूप भारी जाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी.
दो किलोमीटर तक सड़क बदहाल, लोगों को भारी परेशानी:
स्थानीय लोगों के अनुसार, चौका से खूंटी पहाड़धार तक करीब दो किलोमीटर सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे वाहनों का परिचालन मुश्किल हो गया है. बारिश के समय सड़क कीचड़मय हो जाती है, जबकि सूखने पर धूल उड़ने से दुकानदारों, राहगीरों और स्कूली बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
मांग के बावजूद नहीं हुई मरम्मत :
सड़क की मरम्मत को लेकर स्थानीय बाजार समिति द्वारा प्रशासन, विधायक और सांसद को आवेदन भी दिया गया था, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. नतीजतन, जर्जर सड़क का खामियाजा आम लोगों को रोजाना भुगतना पड़ रहा है.
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