Seraikela Kharsawan News : अंधेरे में खड़े ब्रेकडाउन हाइवा से टकरायी दो बाइक, 3 गंभीर, 19 घंटे तक सड़क जाम
वाहन में न इंडिकेटर, न रिफ्लेक्टर एंबुलेंस की देरी से भड़का आक्रोश
By ATUL PATHAK | Updated at :
राजनगर. हाता-चाईबासा मुख्य मार्ग (एनएच-220) पर रघुनाथपुर गांव के समीप सड़क किनारे खड़े एक खराब (ब्रेकडाउन) हाइवा रविवार रात दो अलग-अलग सड़क हादसों का सबब बन गया. इन घटनाओं में तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है. घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने रविवार शाम से ही सड़क जाम कर दिया है, जो 19 घंटे बाद मंगलवार की शाम पांच बजे समाप्त हुआ. सड़क के दोनों ओर लगभग 8 किलोमीटर और राजनगर-सरायकेला मार्ग पर 6 किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लगी गयी.
एक ही जगह, ढाई घंटे के अंतराल पर दो हादसे:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहली घटना रविवार शाम करीब सात बजे हुई. कमारबासा निवासी विश्वकर्मा लोहार (25) अपनी बाइक से घर लौट रहे थे, तभी अंधेरे में खड़े हाइवा से उनकी सीधी भिड़ंत हो गयी. उन्हें एमजीएम जमशेदपुर रेफर किया गया है. अभी पुलिस और प्रशासन इस मामले को संभाल ही रहे थे कि रात करीब साढ़े नौ बजे दूसरी घटना घट गयी. इस घटना के बाद करीब सोमवार की रात 10 बजे से जाम लग गया. हादसे में जोलडीहा निवासी मनीष प्रधान (22) और चक्रधरपुर निवासी शिबो प्रधान (27) भी उसी हाइवा की चपेट में आ गए. दोनों को टीएमएच जमशेदपुर रेफर किया गया है, जहां उनकी हालत चिंताजनक बतायी जा रही है.
वार्ता के बाद जाम हटा:
जाम की सूचना पर डीएसपी पूजा कुमारी, बीडीओ मलय कुमार, सीओ श्रवण कुमार झा और थाना प्रभारी विपुल कुमार ओझा दलबल के साथ मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण लिखित आश्वासन और ठोस समाधान की मांग पर अड़े रहे. इसके बाद प्रशासन और ग्रामीणों के बीच वार्ता का दौर जारी था, मंगलवार को करीब शाम पांच बजे जाम हटा. इसके बाद वाहनों का आवागमन सुचारू रूप से चालू हुआ.
ग्रामीणों का आरोप : लापरवाही से हादसा
घटनास्थल पर जुटे ग्रामीण काफी आक्रोशित हैं. लोगों का कहना है कि सड़क पर खड़े हाइवा में न तो इंडिकेटर जल रहा था और न ही कोई चेतावनी संकेत (रिफ्लेक्टर) लगाया गया था. इसके अलावा 108 एंबुलेंस के समय पर न पहुंचने को लेकर भी ग्रामीणों में भारी नाराजगी है.
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
घायलों के बेहतर इलाज की पूरी जिम्मेदारी, 25 लाख का मुआवजा, घायलों के परिजनों के जीवनयापन के लिए मासिक भत्ता, बेटियों की शादी के लिए प्रशासनिक सहायता.