खरसावां. सरायकेला के जगन्नाथपुर में श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में समापन हुआ. कथास्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए और व्यास पीठ की पूजा-अर्चना कर आरती में सहभागी बने. पूरे परिसर में भक्ति भाव से ओत-प्रोत वातावरण बना रहा. कथावाचक पंडित रामनाथ होता ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के लिए परम सौभाग्य की बात है, क्योंकि यह कथा मोक्ष प्रदान करने वाली है. उन्होंने राजा परीक्षित की कथा का उदाहरण देते हुए बताया कि केवल कथा श्रवण से ही उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया था. कहा कि जब मनुष्य हृदय से प्रभु का स्मरण करता है, तब उसके जीवन के द्वार मोक्ष की ओर खुल जाते हैं. भगवद्गीता में मानव जीवन का सार निहित है, जो सद्कर्म, परोपकार और आत्मशुद्धि की प्रेरणा देता है. कथावाचक ने कार्तिक माह की महत्ता का भी उल्लेख किया. कहा कि यह माह भक्ति, सेवा और साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है. उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि जहां भी भागवत कथा या प्रभु सत्संग का आयोजन हो, वहां अवश्य उपस्थित रहें, क्योंकि कथा श्रवण से मन के विकार दूर होते हैं और आत्मा निर्मल होती है. प्रभु के नाम का स्मरण करते हुए दिनभर का वातावरण भक्तिमय बना रहा.
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