बारिश के मौसम में लुभा रहा सोना झरना, तस्वीरों में देखें पहाड़ों के बीच बिखरी कुदरत की अनुपम छटा

सरायकेला-खरसावां के हेंसाकोंचा में स्थित सोना झरना बारिश के मौसम में अपनी अनुपम छटा बिखेर रहा है। जानें इस खूबसूरत पर्यटन स्थल और वहां की सुविधाओं के बारे में।

खरसावां : झमाझम बारिश के साथ ही सरायकेला-खरसावां जिले के सीमावर्ती पाहाड़ी क्षेत्र में स्थित प्राकृतिक ‘सोना झरना’ अनुपम छटा बिखेर रहा है. खरसावां प्रखंड से सटे चांडिल प्रखंड की हेंसाकोंचा पंचायत के हेंसाकोंचा गांव में घने जंगलों और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित झरना इन दिनों अपने पूरे शबाब पर है. लगातार बारिश के बीच पहाड़ों से झरने में पानी का प्रवाह बढ़ गया है. ऊंचाई से गिरता दूधिया पानी, चारों ओर फैली हरियाली और पहाड़ियों के बीच बना प्राकृतिक वातावरण यहां पहुंचने वाले लोगों को रोमांचित कर रहा है.


झरना से गिरता पानी.

पहाड़ों के बीच झरने का मनमोहक नजारा

बारिश के मौसम में सोना झरना की खूबसूरती देखते ही बनती है. ऊंचाई से गिरता पानी जब चट्टानों से टकराकर नीचे आता है, तो आसपास का पूरा वातावरण बेहद खूबसूरत नजर आता है. घने जंगल और हरे-भरे पहाड़ इस प्राकृतिक दृश्य को और आकर्षक बना रहे हैं. यही वजह है कि युवाओं की टोली अपने दोस्तों के साथ यहां पहुंचकर प्रकृति का आनंद ले रही है. हरियाली और पहाड़ों के बीच समय बिता रहे हैं. बारिश के बाद आसपास का जंगल भी और अधिक हरा-भरा हो गया है. इससे पूरे क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य निखर उठा है.

पहाड़ों से गिरता दूधिया पानी करता है आकर्षित

सोना झरना घने पहाड़ों और जंगलों के बीच स्थित है. बारिश होने के बाद पहाड़ों से पानी कई धाराओं के रूप में नीचे गिरता है. पानी के तेज प्रवाह के साथ झरने का दृश्य काफी मनमोहक नजर आता है. झरने के आसपास मौजूद चट्टानें, पेड़-पौधे और पहाड़ी वातावरण इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार गर्मी के मौसम में यह पूरी तरह से सुख जाता है और बारिश के दिनों में सोना झरना का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है. बारिश बढ़ने के साथ झरने में पानी का प्रवाह भी तेज हो जाता है. इसी प्राकृतिक नजारे को देखने के लिए आसपास के गांवों के अलावा दूसरे क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं. प्रकृति प्रेमियों और युवाओं के लिए यह स्थान विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है.


हरियाली से घिरा है क्षेत्र.

सुविधाएं बढ़ें तो बन सकता है प्रमुख पर्यटन स्थल

सोना झरना में पर्यटन की अच्छी संभावनाएं हैं. प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र खरसावां और चांडिल के बीच एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है. यदि प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से यहां बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाए, तो पर्यटकों की संख्या और बढ़ सकती है. स्थानीय स्तर पर सड़क, पेयजल, शौचालय, बैठने की जगह, सुरक्षा व्यवस्था और साफ-सफाई की सुविधा उपलब्ध कराने की जरूरत है. इसके अलावा पर्यटकों के लिए सूचना बोर्ड, झरने तक सुरक्षित पहुंचने के लिए रास्ता और आसपास छोटे स्थानीय बाजार या खान-पान की व्यवस्था विकसित की जा सकती है. इससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं.


झरना से गिरता पानी.

खरसावां से 20, बड़ामटांड से सात किमी की दूरी

खरसावां से रायजामा-चैतनपुर होते हुए करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय कर सोना झरना पहुंचा जा सकता है. वहीं टाटा-रांची एनएच-33 पर चौका के पास बड़ामटांड से करीब सात किलोमीटर की दूरी तय कर भी यहां पहुंचा जा सकता है. प्राकृतिक सुंदरता के कारण बारिश के मौसम में यह स्थान खासकर युवाओं और प्रकृति प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. सोशल मीड़िया पर भी सोना झरना इन दिनों खूब ट्रेंड कर रहा है.


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लेखक के बारे में

By शचिंद्र कुमार दाश

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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