Seraikela Kharsawan News : खटिया पर मरीज, चुआं के पानी से बुझ रही प्यास

आतरा के छह टोलों में नहीं पहुंची विकास की किरण, ग्रामीण आजीविका के लिए पूरी तरह वनोत्पाद पर निर्भर

खरसावां. सरायकेला-खरसावां जिले की अंतिम सीमा पर घने जंगलों और ऊंची-नीची पहाड़ियों के बीच बसे कुचाई प्रखंड के रोलाहातु पंचायत का आतरा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. खूंटी जिले के अडकी प्रखंड से होकर पहुंचने वाले इस गांव के छह टोले हुडांगदा, तिलुडीह, बांदुगुटू, नवाटोला, श्रीजंग और तारोपडीह आजादी के दशकों बाद भी सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं. इन दुर्गम टोलों की जमीनी हकीकत जानने के लिए विधायक दशरथ गागराई ने कभी बाइक से तो कभी पैदल उबड़-खाबड़ रास्तों और पगडंडियों का सफर तय कर वे ग्रामीणों के बीच पहुंचे और जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याओं को सुना.

छह टोलों तक पहुंचने का रास्ता नहीं

जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि आतरा गांव तक तो पक्की सड़क है, लेकिन वहां से इन छह टोलों तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है.

मरीज को खटिया पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है:

सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस गांव तक नहीं आ पाती है. गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को आज भी खटिया पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है.

चुआं का पानी पी रहे लोग:

पथरीला रास्ता होने के कारण भारी मशीनें नहीं पहुंच पाईं, जिससे यहां चापाकल तक नहीं लग सके हैं. ग्रामीण आज भी पहाड़ियों के नीचे स्थित ””””चुआं”””” (झरना/खोला) का पानी पीकर प्यास बुझा रहे हैं.

श्रमदान कर रास्ता बनाया

ग्रामीणों ने खुद मेहनत कर पगडंडियों को चलने लायक बनाया है, लेकिन बारिश के दिनों में ये रास्ते जानलेवा हो जाते हैं. मौके पर सतरी सांगा, भोंज सांगा, नारायण मुंडा, सूर्या मुंडा, इलिहास सामड़, धर्मेंद्र मुंडा, राम सोय, राहुल सोय आदि उपस्थित रहे.

सड़क बनते ही खुलेगा विकास का द्वार : विधायक

विधायक दशरथ गागराई ने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि मैंने रोलाहातु के सभी 14 मौजा का भ्रमण किया है. इन गांवों तक पक्की सड़क पहुंचाना मेरी पहली प्राथमिकता है. सड़क बनते ही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर खुद-ब-खुद गांव तक पहुंच जाएंगे. उन्होंने जल्द ही एक-एक कर सभी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया. यह क्षेत्र कभी घोर नक्सल प्रभावित माना जाता था, जहां बाहरी लोगों का जाना भी दूभर था. लेकिन अब नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बाद विकास की नयी उम्मीद जगी है. विधायक के इस दौरे से ग्रामीणों में यह विश्वास जागा है कि अब उनका गांव भी मुख्यधारा से जुड़ सकेगा.

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Author: ATUL PATHAK

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