seraikela kharsawan news: धान खरीद में पिछड़ा जिला, लक्ष्य का सिर्फ एक तिहाई पूरा हुआ

सरायकेला. 1.95 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले जिले में सिर्फ 70 हजार क्विंटल धान की खरीद

खरसावां. सरकारी स्तर पर धान खरीद मामले में सरायकेला-खरसावां जिला अब भी लक्ष्य से काफी पीछे है. जिला में सिर्फ 36 फीसदी ही धान खरीदी हुई है. 15 दिसंबर से जिले में धान की खरीद शुरू हुई. शुरुआती दिनों में तीन लाख क्विंटल धान खरीदी करने का लक्ष्य दिया गया था. बाद में संशोधन कर लक्ष्य को कम करते हुए 1.95 लाख क्विंटल फिक्स किया गया. अभी तक यह लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सका है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक सिर्फ 70,174.58 क्विंटल धान की खरीदी हुई है.

लैंपसों में 30 अप्रैल तक होगी धान खरीदी

सरायकेला-खरसावां जिले के 18 लैंपसों में सरकारी स्तर पर धान की खरीदारी हो रही है. सरकार की ओर से अगले 30 अप्रैल तक धान खरीदने का निर्देश जारी किया है. साथ ही निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप धान क्रय के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया गया है. इधर, लैंपस में धान की खरीद की प्रक्रिया चल रही है. इस वर्ष भी धान खरीद के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने की संभावना कम दिख रही है. पिछले तीन-चार वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो एक बार भी लक्ष्य के अनुरूप धान खरीदी नहीं हो सकी है.

जिले में सिर्फ 1330 किसानों ने केंद्रों में धान बेचा

जिले में कुल 4321 पंजीकृत किसान हैं. लैंपसों में धान खरीद के लिए सभी किसानों को एसएमएस भेजा गया है. इसमें से सिर्फ 1330 किसानों ने ही लैंपस में जाकर धान बेचा है. लैंपसों में धान की बिक्री करने वाले किसानों में से 1283 को एक किस्त तथा 801 किसानों को दोनों किस्त का भुगतान कर दिया गया है.

तिरुलडीह में सर्वाधिक, सबसे कम मुरुप में हुई धान खरीदी

किसानों को बिचौलियों से बचाने एवं उनकी उपज का समर्थन मूल्य देने के उद्देश्य से सरकार ने लैंपस में धान खरीदी शुरू की थी. लेकिन अब भी सरकार की ओर से जारी लक्ष्य से काफी पीछे है. जिला में सर्वाधिक तिरुलडीह लैंपस (67.5 फीसदी) व सबसे कम मुरुप लैंपस (9.10 फीसदी) धान की खरीदारी हुई है.

धान खरीद की धीमी रफ्तार के कई कारण

किसानों के अनुसार, सरायकेला-खरसावां जिले में किसानों से लक्ष्य के अनुरूप धान की खरीद नहीं हो पाने के कई कारण है. लैंपस के जरिये धान की बिक्री करने पर किसानों को पैसे मिलने में देरी होती है. लैंपसों में खोले गये धान क्रय केंद्रों में किसानों को धान का आधा दाम एक सप्ताह में तथा बाकी के पैसों का भुगतान करने में काफी देरी होती है. किसानों से धान में नमी के नाम पर पांच से सात फीसदी तक धान की कटौती व खेत-खलिहान से लैंपस तक ले जाने के दौरान होने वाले ट्रांसपोर्टिंग का अतिरिक्त खर्च भी एक कारण है. जबकि दूसरी ओर बाहर के व्यापारी तुरंत नगद में भुगतान कर धान की खरीदारी कर लेते हैं. तुरंत पैसा मिलने के कारण किसानों को आगामी फसल के लिए आर्थिक परेशानी नहीं होती है. हालांकि, व्यापारी को धान बेचने पर किसानों को सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पैसा मिलता है. इसके अलावे जिला में हो रही धान के पैदावार की तुलना में खरीद का लक्ष्य अधिक रखा गया है.

जिले में लैंपसवार धान खरीद की स्थिति

लैंपस : धान खरीद का लक्ष्य(क्विंटल) : खरीदारी : प्रतिशत

भादूडीह : 5000 : 1420.79 : 28.42

चांडिल : 7000 : 2385.09 : 34.07

दलभंगा : 4000 : 533.10 : 13.33

दुलमी : 15000 : 5051.14 : 33.67

गुंडा : 10000 : 3136.71 : 31.37

जामबनी : 21000 : 9721.88 : 46.29

जशपुर : 5000 : 1033.67 : 20.67

जुमाल : 9000 : 3790.54 : 42.12

खरसावां : 20,000 : 7019.51 : 35.10

खूंटी : 8000 : 2079.96 : 26

कुचाई : 6000 : 1851.53 : 30.86

लेपाटांड़ : 17000 : 3291.71 : 19.36

मुरुप : 4000 : 363.96 : 09.10

नारायणपुर : 21000 : 8071.37 : 38.44

रुगड़ी : 10000 : 3305.74 : 33.06

सरायकेला : 10000 : 4191.20 : 41.91

सितु : 8000 : 2801.14 : 35.01

तिरुलडीह : 15000 : 10125.53 : 67.5

कुला : 1,95,000 : 70174.58 : 35.99

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Author: DEVENDRA KUMAR

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