सरायकेला: श्रावण मास की दूसरी सोमवारी पर सोमवार को सरायकेला में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला. इस अवसर पर भव्य कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया. कांवड़ यात्रा का शुभारंभ खरकई नदी स्थित संजय घाट से किया गया. सुबह से ही संजय घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी. सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु महिला पुरुष और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में कांवड़ यात्रा में शामिल हुए. सभी श्रद्धालुओं ने सबसे पहले खरकई नदी में पवित्र स्नान किया. इसके बाद विधि विधान से कलश और कांवड़ में जल भरा गया.
भजन कीर्तन और शिव मंत्रों का हुआ जाप
करीब 5 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए सभी श्रद्धालु कुदरसाई स्थित बाबा बुद्धेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे. मंदिर परिसर में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ का जल से जलाभिषेक किया. जलाभिषेक के बाद सभी ने सुख शांति और समृद्धि की कामना की. मंदिर में डीजे पर भजन कीर्तन और शिव मंत्रों का जाप चलता रहा. कांवड़ यात्रा को सफल बनाने के लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. यात्रा मार्ग पर पुलिस बल तैनात किए गए थे. वहीं श्रद्धालुओं की सेवा के लिए समाजसेवियों ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया.
कांवड़ियों में बांटी पानी की बोतल और शरबत
सरायकेला नगर क्षेत्र के जगह जगह भक्तों द्वारा कांवड़ियों की सेवा के लिए स्टॉल लगाया गया था. सदर अस्पताल सरायकेला चौक पर स्थानीय युवकों द्वारा कांवड़ियों के बीच पानी की बोतल और ठंडे शरबत और फल का वितरण किया गया. गर्मी को देखते हुए जगह जगह ठंडे पेयजल की व्यवस्था की गई थी.यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि श्रावण सोमवार को बाबा का जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कांवड़ यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि यह सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी देती है.
आयोजकों ने कहा कि हर वर्ष श्रावण मास में कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जाता है. इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में काफी वृद्धि देखी गई. बाबा बुद्धेश्वर नाथ मंदिर परिसर में दिन भर श्रद्धालुओं की कतार लगी रही. पूरे मार्ग में शिव भक्ति का माहौल रहा.
