सरायकेला. राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत राजनगर स्थित एसएस प्लस-2 उच्च विद्यालय में जागरूकता एवं मुख स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों से अवगत कराना तथा मुख स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना था. तंबाकू कानून और स्वास्थ्य पर दी गई विस्तृत जानकारी कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को तंबाकू सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों, विशेषकर मुख कैंसर के खतरे के बारे में जानकारी दी. साथ ही सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA)-2003 तथा झारखंड संशोधित अधिनियम-2021 के प्रमुख प्रावधानों की भी जानकारी दी गई.
200 विद्यार्थियों की जांच, तंबाकू सेवन से सभी मिले दूर
विद्यार्थियों को तंबाकू मुक्त जीवन अपनाने की शपथ दिलाई गई. 200 विद्यार्थियों की हुई मुख स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम के दौरान कक्षा 11 के लगभग 200 विद्यार्थियों का मुख स्वास्थ्य परीक्षण किया गया. जांच में अधिकांश विद्यार्थियों का मुख स्वास्थ्य सामान्य पाया गया. केवल चार से पांच विद्यार्थियों में उपचार की आवश्यकता चिन्हित की गई. राहत की बात यह रही कि किसी भी विद्यार्थी में खैनी, गुटखा अथवा अन्य तंबाकू उत्पादों के सेवन के संकेत नहीं मिले.
स्कूल के पास तंबाकू दुकानों पर सख्ती
विद्यालय के आसपास तंबाकू दुकानों पर सख्ती जागरूकता अभियान के तहत राजनगर क्षेत्र की 25 से 30 दुकानों का भी निरीक्षण किया गया. दुकानदारों को COTPA अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए विद्यालय के 100 मीटर की परिधि में संचालित तंबाकू उत्पादों की दुकानों को पांच दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया गया. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि निर्धारित अवधि के बाद भी नियमों का पालन नहीं होने पर पुलिस के सहयोग से विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी. सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों के विरुद्ध स्पॉट फाइन की कार्रवाई भी जारी रहेगी.
विशेषज्ञों ने तंबाकू से दूर रहने का दिया संदेश
विशेषज्ञों ने किया जागरूक कार्यक्रम में सदर अस्पताल, सरायकेला की वरिष्ठ दंत शल्य चिकित्सक डॉ. कामिनी लता, दंत स्वास्थ्य विशेषज्ञ राजू कुमार पासवान एवं परामर्शी अशोक यादव ने विद्यार्थियों को मुख की नियमित साफ-सफाई, तंबाकू से दूरी और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया. विशेषज्ञों ने कहा कि "जिंदगी चुनें, तंबाकू नहीं. " यही स्वस्थ समाज की सबसे बड़ी पहचान है.
