सरायकेला के रायजामा से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela Kharsawan News: सरायकेला-खरसावां जिले के सीमावर्ती खरसावां प्रखंड के रायजामा के ग्रामीणों ने पेयजल संकट से निपटने के लिए सामुदायिक स्तर पर अनूठी पहल की है. गांव के पास पहाड़ियों के बीच स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों से पाइपलाइन के माध्यम से टोलों तक तक पहुंचाकर पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की है. रायजामा गांव के साथ साथ पास के फेचांग टोला में दो ओर स्थानों पर प्राकृतिक जल स्रोतों का उपयोग कर ग्रामीणों ने सामूहिक सहयोग से जलापूर्ति की व्यवस्था विकसित की है. इससे क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिली है और दैनिक पेयजल जरूरतों की पूर्ति हो रही है. हालांकि ग्रामीणों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए सरकारी जलापूर्ति योजना का भी लाभ मिलना आवश्यक है.
रायजामा में दो चापाकल और एक जल मीनार खराब
71 परिवार वाले रामजामा गांव में सरकार की ओर से लगाए गए दो चापाकल खराब है. पुरानी जलापूर्ति योजना खराब पड़ा हुआ है. एक सोलर संचालित मिनी जल मीनार ठीक ठाक है, परंतु इससे ग्रामीणों की जरुरतें पुरी नहीं हो पाती है. ऐसे में गांव के लोग प्राकृतिक जल स्रोत से निकलने वाली पानी का उपयोग करते है. इसके अलावा खेतों की सिंचाई में भी इसी पानी का उपयोग किया जाता है, जिससे किसानों को काफी सुविधा मिलती है.
फेचांग टोला में चापाकल या जल मीनार नहीं
रायजामा के फेचांग टोला में एक भी चापाकल या जल मीनार नहीं है. दोनों टोला में करीब 12 परिवार निवास करते है. इस टोला के लोगों की प्यास भी पाहाड़ से निकलने वाली प्राकृतिक जल स्रोतों की शितल पानी से ही बुझती है. इसी पानी से ग्रामीण अपनी पेयजल आवश्यकताओं के साथ-साथ भोजन बनाने और अन्य घरेलू कार्यों को पूरा करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि प्राकृतिक जल स्रोत उनके लिए जीवनरेखा हैं, लेकिन सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
600 फीट ऊंची पहाड़ी से पाइप और बांस के सहारे गांव पहुंच रहा पानी
खरसावां प्रखंड के सीमावर्ती गांव के लोग आपसी सहयोग और सहभागिता से करीब 600 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों से पाइप एवं बांस के सहारे पानी को गांव तक पहुंचा रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार रायजामा की पहाड़ियों में स्थित प्राकृतिक जल स्रोतों से वर्ष भर पानी का प्रवाह बना रहता है. ऊंचाई से पानी आने के कारण बिना किसी मोटर या पंप के तेज गति से पानी गांव तक पहुंच जाता है. यही कारण है कि गांव के अधिकांश परिवार इसी जल स्रोत पर निर्भर हैं. ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से यह व्यवस्था सामुदायिक सहयोग के बल पर संचालित हो रही है. समय-समय पर पाइप और बांस की मरम्मत भी ग्रामीण खुद मिलकर करते हैं, जिससे जलापूर्ति बाधित न हो.
बारिश के मौसम में स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है
ग्रामीणों के लिए बारिश के मौसम में स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है. पहाड़ियों से बहकर आने वाली चिकनी मिट्टी और गाद पानी में मिल जाने से जल स्रोत का पानी गंदा हो जाता है. ऐसे समय में पेयजल की समस्या उत्पन्न हो जाती है और ग्रामीणों को स्वच्छ पानी के लिए दूर-दराज के स्रोतों का सहारा लेना पड़ता है. हालांकि ग्रामीणों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए सरकारी जलापूर्ति योजना का भी लाभ मिलना आवश्यक है.
2023-244 तक घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र था रायजामा
खरसावां-रड़गांव मुख्य मार्ग पर रांची जिले के तमाड़ क्षेत्र से सटे रायजामा गांव वर्ष 2023-24 तक घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता है. पिछले दो वर्षों से इस क्षेत्र में नक्सल गतिविधियां समाप्त हुई है. अब क्षेत्र में विकास की नयी उम्मीद देखी जा रही है.
विधायक दशरथ गागराई ने रायजामा का किया दौरा
खरसावां विधायक दशरथ गागराई ने रायजामा और इसके विभिन्न टोलों का दौरा किया. साथ ही प्राकृतिक जल स्रोतों का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति को देखा. विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि जल्द ही पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (पीएचईडी) के अधिकारियों के साथ इन तीनों स्थलों का संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा. प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक जलापूर्ति व्यवस्था विकसित करने के लिए उन्होंने पहल करने की बात कही. जिससे ग्रामीणों को वर्ष भर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके. उन्होंने गांवों को हर घर नल योजना से जोड़ने और जल शोधन की व्यवस्था करने की भी बात कही. प्राकृतिक जल स्रोतों से खेती में सिंचाई समेत अन्य जरुरतों को लोग पूरा कर सकेंगे. ग्रामीणों ने ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि पेयजल समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा. इस दौरान मुख्य रुप से सोयना सरदार, उपेंद्र सरदार, मेघनाथ सरदार, खुदीराम उगुरसांडी, राम हांसदा, रामेश्वर सरदार, जगन सरदार, सोमा सरदार, लटकन सरदार, सुनित सरदार समेत गांव के लोग उपस्थित थे.
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