सरायकेला. सरायकेला स्थित इंस्टीट्यूट फॉर एजुकेशन में शुक्रवार को जीएसटी सुधारों एवं ग्रामीण व शहरी आजीविका और रोजगार पर प्रभाव विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ हुआ. सम्मेलन का उद्घाटन सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर बीके गुप्ता, सिंहभूम चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मानव केडिया, सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी और मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. केबी सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर बीके गुप्ता ने पावरप्वाइंट के माध्यम से जीएसटी के प्रभावों पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2017 को लागू जीएसटी ने जटिल वैट प्रणाली से मुक्ति दिलायी है. जीएसटी सुधार 2.0” के तहत दवा और पाठ्य सामग्री जैसी वस्तुओं को कर मुक्त किया गया है. जबकि ट्रैक्टर पर कर घटाकर 5% करने से ग्रामीण क्षेत्रों में मशीनीकरण और रोजगार के अवसर बढ़े हैं. उन्होंने कहा कि कर दरों में कमी से आम लोगों की क्रय शक्ति भी मजबूत हुई है.
लॉजिस्टिक लागत में कमी और पारदर्शिता में वृद्धि:
मुख्य वक्ता डॉ केबी सिंह ने कहा कि जीएसटी ने देश के विकास को नयी गति दी है. इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आयी है और विभिन्न राज्यों के टैक्स सिस्टम की जटिलताओं से राहत मिली है. उन्होंने उम्मीद जतायी कि आने वाले समय में ग्रामीण बाजार भी शहरी बाजारों के बराबर विकसित होंगे.
स्थानीय स्तर पर जागरुकता बढ़ाने पर जोर:
नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी ने पंचायत स्तर पर जीएसटी फाइलिंग की जानकारी के लिए कार्यशालाएं आयोजित करने का सुझाव दिया. वहीं मानव केडिया ने छात्रों से क्षेत्रीय विकास में भागीदारी की अपील की.कॉलेज के निदेशक आरएन महांती ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि सम्मेलन की संयोजक प्रो. (डॉ.) शुक्ला महांती ने इसे शोध और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया. कार्यक्रम का समापन प्राचार्य डॉ. स्वीटी सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.
तकनीकी सत्रों में शोध पत्रों की प्रस्तुति:
पहले दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें देशभर के प्रतिभागियों ने जीएसटी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शहरी रोजगार और डिजिटल ढांचे से जुड़े विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए.