आयुष दिवस पर सवाल : सरायकेला में 33 केंद्र, लेकिन आयुर्वेद और यूनानी का एक भी डॉक्टर नहीं

सरायकेला में विश्व आयुर्वेद दिवस की तैयारियां जारी हैं, पर आयुष व्यवस्था चरमराई हुई है. सुविधाओं की कमी और डॉक्टरों की अनुपस्थिति चिंता का विषय बनी हुई है.

सरायकेला : जिला आयुष कार्यालय सरायकेला में बुधवार को विश्व आयुर्वेद दिवस मनाया जायेगा. एक ओर जहां विभाग इस उत्सव की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर जिले के आयुष महकमे की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

मूलभूत सुविधाओं और भवनों की कमी

सरायकेला जिले में कुल 33 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं, जहां 26 आयुष स्वास्थ्य पदाधिकारी पदस्थापित और प्रतिनियोजित हैं. आयुष विभाग द्वारा प्रतिमाह सभी प्रखंडों में पदस्थापित चिकित्सकों के माध्यम से विभिन्न ग्रामों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों की मुफ्त स्वास्थ्य जांच और दवाएं वितरित करने का दावा किया जाता है. लेकिन हकीकत यह है कि इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कहीं-कहीं बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे चिकित्सकों को कार्य करने में भारी कठिनाई होती है. कई जगह अपना भवन न होने के कारण ये केंद्र अन्य सरकारी भवनों में संचालित हो रहे हैं. आलम यह है कि जिला संयुक्त औषधालय का अपना भवन नहीं होने के कारण, आयुष्मान आरोग्य मंदिर सरायकेला के मात्र दो कमरों में जिला कार्यालय चलाया जा रहा है.

जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी का पद रिक्त

सरायकेला-खरसावां जिले में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी का पद रिक्त है. जिले के किसी भी आयुष केंद्र में एक भी नियमित चिकित्सक नहीं है. पूरा विभाग प्रभारी और सीएचओ के सहारे चल रहा है. 12 अगस्त 2024 तक डॉ कृष्ण कुमार जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी के रूप में प्रतिनियुक्त थे, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद से यह पद खाली हो गया. इसके बाद 13 अगस्त 2024 को पूर्वी सिंहभूम जिले की जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ पूनम कुमारी को सरायकेला-खरसावां का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. तब से डॉ पूनम कुमारी अकेले ही दोनों जिलों का संचालन कर रही हैं.

जिले में एक भी आयुर्वेदिक या यूनानी चिकित्सक नहीं

जिले में कुल 13 आयुर्वेदिक, 5 होमियोपैथिक और 2 यूनानी चिकित्सा केंद्र संचालित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि ये सभी केंद्र होमियोपैथ विंग के सीएचओ द्वारा चलाए जा रहे हैं. जिले में आयुर्वेद और यूनानी का एक भी चिकित्सक पदस्थापित नहीं है, जबकि बड़ी संख्या में ग्रामीण आज भी आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज कराना ही सबसे अधिक पसंद करते हैं. प्रभारी जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ पूनम कुमारी ने बताया - जिले में 21 एचडब्ल्यूसी, 9 एचएससी एवं 1 जिला संयुक्त औषधालय (जिसमें 3 यूनिट हैं) संचालित है. जिला संयुक्त औषधालय को छोड़कर बाकी सभी केंद्रों पर सीएचओ द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा है. राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत साल 2022 से जिले के सभी आयुष केंद्रों में सीएचओ की नियुक्ति कर स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं.

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By Dheeraj Singh

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