सरायकेला में राष्ट्रीय लोक अदालत में 7730 मामलों का निष्पादन, 1.14 करोड़ के राजस्व की वसूली

Seraikela News: सरायकेला में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में 7730 मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निष्पादन किया गया. इस दौरान करीब 1.14 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली हुई. लोक अदालत में बैंक ऋण, पारिवारिक विवाद, एमएसीटी और दीवानी मामलों का त्वरित निपटारा किया गया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

सरायकेला से प्रताप मिश्रा की रिपोर्ट

Seraikela News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिला में शनिवार को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) द्वारा सिविल कोर्ट, सरायकेला में राष्ट्रीय लोक अदालत का सफल आयोजन किया गया. इस दौरान बड़ी संख्या में वादकारी, लाभुक, अधिवक्ता, पारा लीगल वालंटियर्स, बैंक अधिकारी और विभिन्न विभागों से जुड़े लोग उपस्थित रहे. लोक अदालत में आपसी समझौते के आधार पर हजारों मामलों का त्वरित निष्पादन किया गया.

आठ बेंचों का किया गया गठन

राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन के लिए सिविल कोर्ट, सरायकेला और अनुमंडलीय न्यायालय चांडिल में कुल आठ बेंचों का गठन किया गया था. इन बेंचों में विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई और निष्पादन किया गया. लोक अदालत में बैंक ऋण वसूली से जुड़े मामले, परक्राम्य लिखत अधिनियम के मामले, दीवानी वाद, विद्युत विभाग और वन विभाग से संबंधित मामले, मोटर वाहन अधिनियम, पुलिस अधिनियम से जुड़े छोटे मामले, एमएसीटी वाद और पारिवारिक विवादों का निस्तारण किया गया. सभी मामलों को आपसी सहमति और समझौते के आधार पर सुलझाने का प्रयास किया गया.

6469 प्री-लिटिगेशन का हुआ निष्पादन

राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 6469 प्री-लिटिगेशन मामलों और 1261 लंबित मामलों का सफल निष्पादन किया गया. इस प्रकार कुल 7730 मामलों का निपटारा किया गया. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि 15 मार्च 2026 से ही प्री-सिटिंग बेंचों का गठन कर मामलों के निष्पादन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे. इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय लोक अदालत में देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने आपसी समझौते के जरिए अपने मामलों का समाधान कराया. लोक अदालत के माध्यम से लगभग 1 करोड़ 14 लाख रुपये की राजस्व और समझौता राशि की वसूली भी की गई.

समझौते के जरिए त्वरित न्याय दिलाना उद्देश्य : पीडीजे

इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डीएलएसए अध्यक्ष रामाशंकर सिंह ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों को आपसी समझौते के आधार पर त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि लोगों में राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण मामलों के निष्पादन की संख्या में भी निरंतर वृद्धि हो रही है. उन्होंने कहा कि लोक अदालतें न्याय प्रक्रिया को सरल, सस्ता और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

पारिवारिक विवाद में बिछड़ा परिवार फिर हुआ एकजुट

राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान एक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिला. भरण-पोषण वाद की सुनवाई कर रही एक बेंच ने आपसी समझौते के आधार पर एक परिवार को पुनः एकजुट कराया. इस पहल को लोक अदालत की मानवीय और सौहार्दपूर्ण भावना का उदाहरण बताया गया. इसके अलावा, समाज के वंचित वर्गों और वृद्ध व्यक्तियों को भी लोक अदालत से विशेष लाभ मिला. कई लाभुकों ने ऋण राशि में राहत और समझौते की प्रक्रिया में सहयोग के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रयासों की सराहना की.

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न्यायिक पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका

राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही. कार्यक्रम में बीरेश कुमार, बी.के. पांडेय, दीपक मलिक, लूसी सोसेन तिग्गा, अनामिका किस्कू, धृति धैर्य और तौसिफ मेराज समेत कई लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया. लोक अदालत के सफल आयोजन से लोगों में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने भविष्य में भी इसी तरह लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रयास जारी रखने की बात कही.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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