प्रतिनिधि, खरसावां
श्रद्धा, परंपरा और उत्कलीय सांस्कृतिक धरोहर का अद्भुत दृश्य गुरुवार को खरसावां और हरिभंजा में देखने को मिला. जय जगन्नाथ के जयघोष, शंखध्वनि और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच महाप्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र, बहन देवी सुभद्रा और सुदर्शन चक्र की ऐतिहासिक रथयात्रा अत्यंत उल्लास के साथ निकाली गयी. वर्ष में केवल एक बार अपने रत्न सिंहासन से बाहर निकलकर भक्तों को दर्शन देने वाले जगत के नाथ का रथ खींचने के लिए सुबह से श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा था.
हरिभंजा : घंटा-घुमुरा की गूंज और नूतन रथ रहा आकर्षण
हरिभंजा में सुबह से श्रीमंदिर परिसर में विशेष पूजन-अर्चन शुरू हुआ. पंडित प्रदीप कुमार दाश और भरत त्रिपाठी के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चतुर्धा विग्रहों को पारंपरिक पोहंडी विधि से मंदिर से बाहर लाया गया. यात्रा में पश्चिम ओडिशा के बोलांगीर से आये लगभग 100 कलाकारों ने पारंपरिक घंटा और घुमुरा लोकनृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिससे संपूर्ण वातावरण सांस्कृतिक रंगों में सराबोर हो गया. ओडिशा के सिद्धहस्त कारीगरों की ओर से निर्मित नया रथ, उसकी बारीक नक्काशी और आकर्षक सजावट श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही.
छेरा-पहंरा की पावन परंपरा निभायी गयी
रथयात्रा से पूर्व हरिभंजा के जमींदार परिवार के संजय सिंहदेव और राजेश सिंहदेव ने सर्वलोक समता की मिसाल पेश करते हुए छेरा-पहंरा की सदियों पुरानी रस्म निभायी. उन्होंने रथ मार्ग पर चंदन मिश्रित जल का छिड़काव कर सोने की झाड़ू से मार्ग को बुहारा (सफाई की). इसके पश्चात महाप्रभु को रथ पर विराजमान कराया गया.
खरसावां राजबाड़ी : राजा ने निभायी रस्म, पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
धार्मिक नगरी खरसावां स्थित ऐतिहासिक राजवाड़ी श्री जगन्नाथ मंदिर से पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विग्रहों को बाहर निकालकर मुख्य मार्ग बड़दांडो (तारा मंदिर के समीप) तक लाया गया. खरसावां राजघराने के राजा गोपाल नारायण सिंहदेव ने छेरा-पहंरा की रस्म पूरी की. तत्पश्चात श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भरकर पवित्र रस्सी थामी और रथ को खींचते हुए मौसीबाड़ी की ओर प्रस्थान कराया. पूरे यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं ने छतों और सड़कों से महाप्रभु पर पुष्पवर्षा की. इस दौरान रानी अपराजिता सिंहदेव, राज पुरोहित अंबुजाक्ष आचार्य, राजगुरु विमला षडंगी, नंदु पांडेय, राकेश दाश, और गोवर्धन राउत समेत हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.
गुंडिचा मंदिर में विराजे प्रभु, 24 जुलाई को होगी बहुदा यात्रा
रथ खींचते हुए श्रद्धालु हरिनाम संकीर्तन करते हुए मौसीबाड़ी स्थित श्रीगुंडिचा मंदिर पहुंचे. मंदिर परिसर में पहुंचते ही महाप्रभु, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य महाआरती उतारी गयी और विशेष भोग अर्पित किया गया. इसके पश्चात श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी और खीर के महाप्रसाद का वितरण हुआ. महाप्रभु जगन्नाथ अगले आठ दिनों तक मौसीबाड़ी में ही विराजमान रहकर भक्तों को दर्शन देंगे. इसके बाद 24 जुलाई को बहुदा यात्रा (पुनर्यात्रा) के माध्यम से अपने बड़े भाई और बहन के साथ पुनः मुख्य श्रीमंदिर लौटेंगे.
