सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela Kharsawan News: सरायकेला-खरसावां जिले में वट सावित्री के अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने 16 श्रृंगार कर व्रत रखा और पूरे श्रद्धा भाव से वट सावित्री की पूजा-अर्चना की. सरायकेला, खरसावां, राजखरसावां, बड़ाबांबो, कुचाई, सीनी और माहलीमुरुप सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने बरगद के पेड़ के नीचे विधिवत पूजा की. सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और संतान प्राप्ति की कामना के लिए वट वृक्ष की पूजा की. व्रत के दौरान सावित्री अमावस्या पर सबसे पहले भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया गया, इसके बाद वट वृक्ष के पास जल अर्पित कर पूजा की शुरुआत की गई. महिलाओं ने माता सावित्री को वस्त्र और सोलह श्रृंगार अर्पित किए और खुद भी पारंपरिक सोलह श्रृंगार कर पूजा में शामिल हुईं. पूजा के दौरान महिलाओं ने वट वृक्ष पर फल-फूल चढ़ाए और रोली से वृक्ष की परिक्रमा की.इस दौरान 5 से लेकर 21 बार तक परिक्रमा कर रक्षा सूत्र बांधकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगा गया. पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा संपन्न कराई. पूजा के पश्चात सावित्री सत्यवान व्रत कथा भी सुनी.
सुहागिनों ने एक दूसरे को लगाया सिंदूर
वट सावित्री पूजा के दौरान सुहागिनों एक-दूसरे को सिंदूर लगाया. पूजा को लेकर सुहागिन महिलाएं सज धज कर वट वृक्ष के नीचे पहुंची थी. सभी नए कपड़े पहनी हुई थी. नवविवाहिता सुहागिनों में पहली बार वट सावित्री पूजा का अलग ही उत्साह देखा गया. व्रतियों ने पूजा के बाद प्रसाद के रुप में सिर्फ फलाहार कर दिन भर व्रत का पारण किया.
घरों में बरगद की डाली के नीचे भी हुई पूजा
सरायकेला और खरसावां के विभिन्न स्थानों पर सुहागिन महिलाओं ने अपने घर के आंगन में बरगद की डाली गाड कर भी पूजा अर्चना की. विधि पूर्वक वट सावित्री व्रत और पूजन से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति सहित संतान की कामना की गयी. साथ ही महिलायें सोलह श्रंगार कर अर्घ्य दिया.
सुहागिन महिलाओं ने क्या कहा?
- व्रती प्रियंका सिंहदेव ने कहा कि शादी के बाद से ही वह हर वर्ष वट सावित्री का व्रत रखती हैं. उन्होंने बताया कि घर की अन्य सुहागिन महिलाएं भी इस व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ करती हैं और सभी रस्मों का विधि-विधान से पालन किया गया. उन्होंने कहा कि पूजा के दौरान सत्यवान और सावित्री के अटूट संबंध की कथा भी सुनी.
- वहीं व्रती संगीता ज्योतिषी ने कहा कि सुहागिन महिलाएं इस व्रत को पूरे उत्साह के साथ मनाती हैं और इसका सालभर इंतजार रहता है. उन्होंने बताया कि वह हर वर्ष यह व्रत रखती हैं और इस बार भी विधि-विधान से पूजा कर पति की दीर्घायु और घर में सुख-समृद्धि की कामना की है.
- कुसुम देवी ने कहा कि हर साल की तरह इस बार भी उन्होंने दिनभर उपवास रखा और पूजा के बाद सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी. उन्होंने बताया कि मंगलवार को व्रत का पारण किया जाएगा और इस व्रत का पौराणिक दृष्टि से विशेष महत्व है.
- सुनीता सिंह मोदक ने कहा कि हिंदू शास्त्रों में वट वृक्ष को देव वृक्ष माना गया है, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है. इसी कारण वट वृक्ष के नीचे वट सावित्री की पूजा की जाती है. उन्होंने भी पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ व्रत रखा है.
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