खरसावां के गोपबंधु चौक में चार दिवसीय ओड़िया नाट्य प्रदर्शनी शुरू, उमड़ी दर्शकों की भीड़

Kharasawan Odia Drama: खरसावां के गोपबंधु चौक में चार दिवसीय ओड़िया नाट्य प्रदर्शनी की शुरुआत हुई. उद्घाटन समारोह में जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग शामिल हुए. नाटक, गीत और नृत्य से दर्शकों का मनोरंजन हुआ. यह आयोजन ओड़िया भाषा, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण को बढ़ावा देने का प्रयास है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश दाश की रिपोर्ट

Kharasawan Odia Drama: झारखंड के खरसावां में राजवाड़ी समीप (गोपबंधु चौक) में चार दिवसीय ओड़िया नाट्य प्रदर्शनी की शुरुआत हुई. भाषा उत्थान एसोसिएशन खरसावां के तत्वावधान में आयोजित इस नाट्य प्रदर्शनी का उदघाटन स्थानीय विधायक दशरथ गागराई, सरायकेला राजघराने के राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव, खरसावां राजघराने के राजा गोपाल नारायण सिंहदेव, रानी अपराजीता सिंहदेव, प्रमुख मनेंद्र जामुदा आदी ने दीप प्रज्वलित कर किया.

राज्य के 6 जिलों में ओडिया भाषी: दशरथ गागराई

इस मौके पर विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि झारखंड के कोल्हान समेत छह जिलों में आज ओड़िया भाषा बोली जाती है. अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा को बचाये रखने की जनसहभागिता जरुरी है. भाषा, संस्कृति से ही हमारी पहचान जुड़ी हुई है. गागराई ने कहा कि वह खूद एक कलाकार है, कला की महत्ता को समझते है. विधायक ने कहा कि भले ही लोग अलग अलग दलों से जुड़ कर कार्य करें, परंतु सामाजिक मुद्दों पर सभी को एक जुट हो कर कार्य करना होगा. उन्होंने ओड़िया भाषी लोगों की समस्याओं के समाधान के लिये एक प्रतिनिधि मंडल के साथ मुख्यमंत्री से मिलने तथा समाधान कराने का भरोसा दिया.

संस्कृति का अभिन्न अंग हैं ओड़िया नाट्य संस्थाएं: राजा

सरायकेला के राजा प्रताप आदित्य सिंहदेव ने कहा कि ओड़िया नाट्य संस्थाएं हमारी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं. ओड़िया नाटक के माध्यम से झारखंड में ओड़िया भाषा, संस्कृति परंपरा जीवित है. नाट्य संस्थायें ओड़िया संस्कृति के संवादक के रुप में कार्य कर रही है. उन्होंने इन संस्थाओं के सरकारी संरक्षण पर भी बल दिया. उन्होंने विधायक दशरथ गागराई से जिले के ओड़िया बहुल क्षेत्रों के स्कूलों में ओड़िया भाषी शिक्षकों के पदस्थापना हेतु पहल करने की अपील की.

संस्कृति के प्रसार में नाट्य संस्थाओं की भूमिका अहम

खरसावां राजघराने के राजा गोपाल नारायण सिंहदेव ने कहा कि ओड़िया नाट्य संस्थायें भाषा, संस्कृति, परंपरा व कला-संस्कृति के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. इसमें क्षेत्र की कला, संस्कृति व परंपरा भी समाहित है. ऐसे आयोजन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे सामाजिक एकजुटता बनी रहेगी.

ओड़िया समुदाय के विभूतियों को श्रद्धांजलि

कार्यक्रम की शुरुआत में ओड़िया समुदाय के विभूतियों को याद कर श्रद्धांजलि दी गयी. सभी अतिथियों ने उत्कलमणी पं गोपबंधु दास की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के पश्चात पूर्व सांसद रुद्र प्रताप षाडंगी, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार दास व ओड़िया एक्टिविस्ट डॉ विश्वनाथ कर की तसवीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. भाषा उत्थान एसोसिएशन, खरसावां के सचिव नंदू पांडेय ने ओड़िया भाषा को संरक्षित करने के साथ साथ ओड़िया कला-संस्कृति को बढ़ावा देना को कार्यक्रम के आयोजन के उद्देश्य बताया. कार्यक्रम के दौरान मुख्य रुप से बासंती गागराई, ग्राम प्रधान सांबो राउत, मुखिया सनिता तापे, उप मुखिया सुशीला नायक, मंगल सिंह जामुदा, नरसिंह चरण पति, रिलु पाणी, जीतवाहन मंडल, मनबोध मिश्रा समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.

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कलाकारों ने दर्शकों का मन मोहा

ओड़िया नाट्य प्रदर्शनी के पहले दिन सबुज संघ कला निकेतन, केरा (चक्रधरपुर) के कलाकारों ने नाटक प्रदर्शित किया. कलाकारों ने ओड़िया नाटक ‘किणी नेला मन कलानगर’ का प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया. कलाकारों ने ओड़िया नाटक ‘के माध्यम से आधुनिकता की दौड़ में समाजिक मूल्य, परंपरा व संस्कारों को नहीं भूलने की सीख दी. कलाकारों ने नाटक के जरीये जीवन के हर पहलू को दर्शाया. नाटक से पूर्व कालकारों ने अपने गीत, संगीत व नृत्य के माध्यम से भी समां बाधा. नाटक को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्यों ने भी भरपुर सहयोग किया. नाटक के साथ साथ गीत संगीत पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे. यहां अगले चार दिनों तक ओड़िया नाट्य संस्थाओं द्वारा ओड़िया नाटकों का प्रदर्शन किया जाएगा.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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