चांडिल : चांडिल में मंगलवार को प्रकृति पूजा का पर्व करम धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया. भाई-बहन के अटूट प्रेम, सुख-समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली का प्रतीक माने जाने वाले इस पर्व को लेकर गांवों में उत्साह का माहौल रहा. महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ करम राजा की पूजा-अर्चना की. परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की.
कुंवारी कन्याओं ने तालाब से बालू लाकर जावा स्थापित किया था
करम पर्व को लेकर तीन दिन पूर्व कुंवारी कन्याओं ने नदी और तालाब से बालू लाकर जावा स्थापित किया था. इसके बाद विधि-विधान से जावा की पूजा की गई. मंगलवार को व्रतियों ने निर्जला उपवास रखकर करम डाली गाड़ी और करम राजा की पूजा-अर्चना की. पूजा के दौरान बहनों ने अपने भाइयों की सुख-समृद्धि, लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की. ग्रामीण क्षेत्रों में करम पर्व की पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों का पालन करते हुए पूजा संपन्न की गई.
करम-धरम की कहानी सुनाई, गीतों पर किया नृत्य
पूजा-अर्चना के दौरान व्रतियों और श्रद्धालुओं को करम-धरम की पारंपरिक कहानी सुनाई गई. कहानी के माध्यम से करम पर्व के महत्व और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को समझाया गया. इसके बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से करम गीत गाए और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया. गीत-संगीत और नृत्य से पूजा स्थल का माहौल भक्तिमय और उत्सवपूर्ण बना रहा. करम पर्व के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में प्रकृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता की झलक देखने को मिली. महिलाओं और युवतियों ने उत्साहपूर्वक पर्व मनाते हुए पारंपरिक संस्कृति को जीवंत बनाए रखा. पूजा के बाद व्रतियों ने पर्व की रस्में पूरी कीं. चांडिल अनुमंडल के विभिन्न गांवों में करम पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा गया.
