खरसावां : दिल्ली में दुनिया के विभिन्न देशों से आये मेहमानों के बीच जब नगाड़ा और मांदर की थाप गूंजी, तो झारखंड की लोक संस्कृति जीवंत हो गयी. रंगीन मुखौटों से सजे कलाकारों ने मंच पर लयबद्ध भंगिमाओं, छलांग और युद्ध मुद्राओं के माध्यम से पौराणिक कथाओं को जीवंत कर दिया. मौका था 12 सितंबर से आयोजित होने वाले ब्रिक्स समिट-2026 को लेकर प्रगति मैदान स्थित नेशनल क्राफ्ट म्यूजियम एंड हस्तकला अकादमी परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का.
जामडीह गांव के कलाकारों ने जमाया रंग
अंतरराष्ट्रीय मंच पर सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड के जामडीह गांव के कलाकारों ने मानभूम शैली के छऊ नृत्य की प्रस्तुति देकर झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को देश-विदेश तक पहुंचाया. अंतरराष्ट्रीय कलाकार परेश प्रसाद पारित के नेतृत्व में ‘पुरुलिया छाऊ डांस एकेडमी’, जामडीह के कलाकारों ने 10 और 11 सितंबर को प्रस्तुतियां दीं. 12 सितंबर को भी दल प्रस्तुति देगा.
गणेश वंदना, महिषासुर मर्दिनी व तारकासुर वध पर दी प्रस्तुति
कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई. इसके बाद महिषासुर मर्दिनी, तारकासुर वध और नृसिंह अवतार समेत धार्मिक कथाओं पर आधारित प्रस्तुतियां दी गयीं. कलाकारों ने संवाद के बजाय शरीर की गति, मुद्राओं और विशाल मुखौटों के माध्यम से कथाओं को प्रस्तुत किया. नेशनल क्राफ्ट म्यूजियम परिसर स्थित ब्रिक्स बाजार में जामडीह के कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक मुखौटे और लयबद्ध नृत्य दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने. विदेशी मेहमानों ने भारतीय लोक संस्कृति के इस अनूठे रूप को करीब से देखा. दल में फाल्गुनी सिंह, शुभाशीष पारित, निरंजन पारित, सुदीप महतो, मिथुन सिंह समेत अन्य कलाकार शामिल रहे.
