खरसावां.
तसर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार से विशेष पैकेज देने की मांग गयी है. शुक्रवार को विधानसभा में शून्यकाल के दौरान विधायक दशरथ गागराई ने मामले को उठाते हुए सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया. कहा कि झारखंड में 35 फीसदी से अधिक तसर कोसा का उत्पादन कोल्हान प्रमंडल में होता है. पिछले तीन वर्षों से लगातार राज्य में तसर कोसा के उत्पादन में भारी कमी आयी है. तसर उद्योग से जुड़े अधिकतर सामान्य सुलभ केंद्र बंद कर दिये गये हैं. केंद्र गांव की महिलाओं के रोजगार सृजन का मुख्य केंद्र हुआ करता था. राज्य सरकार से तसर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए स्पेशल पैकेज की व्यवस्था करने की मांग की है.झारखंड में तीन साल से उत्पादन में आ रही गिरावट:
खरसावां. झारखंड में तसर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र व राज्य सरकार लगातार सक्रिय रही है. तीन वर्षों से कच्चे तसर के उत्पादन में लगातार कमी आ रही है. इस वर्ष राज्य में करीब 1350 मीट्रिक टन कच्चे रेशम का उत्पादन हो पाया है. झारखंड में वित्तीय वर्ष 2013-14 से 2020-21 तक औसतन 2000 मीट्रिक टन से अधिक कच्चे रेशम का उत्पादन होता था. वर्ष 2021-22 से लगातार उत्पादन घटता चला गया. झारखंड का खरसावां-कुचाई ऑर्गेनिक रेशम उत्पादन के लिए देश में प्रसिद्ध है. यहां रेशम कीट पालन से लेकर कोसा उत्पादन तक में रसायन का उपयोग नहीं होता है. यहां के कुकून की काफी मांग है. मालूम हो कि देश में उत्पादित तसर में 60 से 65 प्रतिशत झारखंड में होता है. पूरे राज्य के 35 फीसदी तसर कोसा का उत्पादन कोल्हान में होता है. देश में वर्तमान में 3.5 लाख लोग तसर आधारित कारोबार से जुड़े हैं. इनमें 2.2 लाख लोग झारखंड के विभिन्न हिस्सों में जुड़े हैं.राज्य में कच्चे रेशम उत्पादन का वर्षवार आंकड़ा
वित्तीय वर्ष : कच्चे रेशम का उत्पादन
2013-14 : 2000 मीट्रिक टन2014-15 : 1943 मीट्रिक टन2015-16 : 2281 मीट्रिक टन2016-17 : 2630 मीट्रिक टन2017-18 : 2217 मीट्रिक टन2018-19 : 2372 मीट्रिक टन2019-20 : 2399 मीट्रिक टन2020-21 : 2184 मीट्रिक टन2021-22 : 1051 मीट्रिक टन2022-23 : 874 मीट्रिक टन2023-24 : 1127 मीट्रिक टन2024-25 : 1350 मीट्रिक टनडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
