खरसावां से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Kharsawan Religious News: देश के प्रमुख धार्मिक तीर्थस्थल काशी, वृंदावन, अयोध्या, मथुरा और हरिद्वार से संतों का एक पवित्र जत्था खरसावां के रामगढ़ व हरिभंजा पहुंचा. यहां पहुंचने पर गांव जमीनदार श्री विद्या विनोद सिंहदेव के नेतृत्व में अंगवस्त्र दे कर सभी का स्वागत किया गया. शुक्रवार की सुबह संतो का यह जत्था खरसावां के हरिभंजा स्थित जगन्नाथ मंदिर पहुंच कर पूजा अर्चना की. साथ ही जगत कल्याण के लिये प्रमुख जगन्नाथ के दरबार में मन्नत मांगा. संतों के आगमन को लेकर क्षेत्र के श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा गया. इसकों लेकर मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की गयी थी. लोगों में प्रासद का भी वितरण किया गया. इस दौरान मुख्य रुप से संजय सिंहदेव, राजेश सिंहदेव, पृथ्वीराज सिंहदेव, कंदर्पराज सिंहदेव समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे.
रामगढ़ में सत्संग और भजन-कीर्तन का भी आयोजन
काशी, वृंदावन, अयोध्या, मथुरा और हरिद्वार से संतों का एक पवित्र जत्था गुरुवार की रात संतों का रात्रि विश्राम हरिभंजा जगन्नाथ मंदिर के प्रथम सेवक विद्या विनोद सिंहदेव के रामगढ़ स्थित निवास पर किया. इस दौरान विशेष तौर पर सत्संग और भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया. जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल हुए. इस दौरान पहुंचे लोगों ने संतो से आशिर्वाद भी लिया. काशी, वृंदावन, अयोध्या, मथुरा और हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थस्थलों से निकले संतों की यह यात्रा पूरी तरह धार्मिक आस्था और भक्ति भाव से ओत-प्रोत है.
जगन्नाथ दर्शन के बाद खरसावां में पहुंचा संतों का जत्था
बताया गया कि महानिर्वाणी अखाड़ा से जुड़े देश के विभिन्न मठ मंदिरों के संतों का यह जत्था ओडिशा के प्रसिद्ध तीर्थस्थल पुरी धाम गया हुआ था. पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन के बाद खरसावां पहुंचा. श्रद्धालुओं का मानना है कि संतों की यह यात्रा आध्यात्मिक एकता और सनातन परंपरा का प्रतीक है. इससे समाज में धार्मिक चेतना और आस्था को और मजबूती मिलती है. इस यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म की परंपराओं को आगे बढ़ाना और समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है. बताया जा रहा है कि संतों का यह जत्था भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के साथ यात्रा कर रहा है.
इसे भी पढ़ें: सरायकेला में सड़क सुरक्षा पर विशेष जांच अभियान, डीटीओ ने गाड़ियों से 2,37,500 जुर्माना वसूले
1200 साल से अधिक पुराना अखाड़ा है महानिर्वाणी अखाड़ा
महानिर्वाणी अखाड़ा (श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी) शैव संप्रदाय का 1200 साल से अधिक पुराना, सबसे प्राचीन और प्रमुख शस्त्रधारी अखाड़ा है. 805 ईस्वी (विक्रम संवत 805) में स्थापित इस अखाड़े का मुख्यालय हरिद्वार में है. इसका मुख्यालय हरिद्वार में है, लेकिन प्रयागराज (इलाहाबाद) में भी इसकी बड़ी पीठ है, जिसे महा निर्वाणी पीठ कहा जाता है. यह नागा साधुओं का केंद्र है और महाकुंभ में सूर्य प्रकाश व भैरव प्रकाश नामक भालों के साथ शाही स्नान करने वाला पहला अखाड़ा माना जाता है.
इसे भी पढ़ें: झारखंड के खरसावां और खूंटी में रसोई गैस की भारी किल्लत, उपभोक्ता परेशान
