seraikela kharsawan news : सुदामा से भगवान ने मित्रता का धर्म निभाया; जिसके पास प्रेमधन, वह निर्धन नहीं हो सकता

सरायकेला मेंं श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ में पं महेंद्र शर्मा जी कहा कि श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता से हमलोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए.

By Prabhat Khabar News Desk | February 25, 2025 11:27 PM

सरायकेला.

सरायकेला प्रखंड के घोड़ालांग गांव में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन कथावाचक पंडित महेश चंद्र शर्मा ने कृष्ण व सुदामा मित्रता प्रसंग पर कथा सुनायी. कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता एक मिसाल है. हमें श्रीकृष्ण सुदामा की मित्रता से प्रेरणा लेनी चाहिए. कथावाचक ने कहा कि पौराणिक कथानुसार, द्वारपाल के मुख से सुदामा के पहुंचने का संदेश सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने राजमहल के द्वार पर पहुंचते हैं. बचपन के मित्र को गले लगाकर श्रीकृष्ण उन्हें राजमहल में अपने सिंहासन पर बैठाकर स्वयं अपने हाथों से उनके पांव पखारते हैं. कहा कि सुदामा से भगवान ने मित्रता का धर्म निभाया. दुनिया के सामने संदेश दिया कि जिसके पास प्रेम धन है, वह निर्धन नहीं हो सकता है. राजा हो या रंक मित्रता में सभी समान हैं. इसमें कोई भेदभाव नहीं है.

श्रवण मात्र से आचरण में होता है बदलाव:

पं शर्मा ने श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं. इसके श्रवण मात्र से ही व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं. विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है.

श्रीकृष्ण व सुदामा की निकली झांकी:

कथा के समापन पर श्रीकृष्ण और सुदामा की झांकी निकाली गयी. झांकी में श्रीकृष्ण व सुदामा ने मित्रता का ऐसा अभिनय किया, जिसे श्रद्धालु देखकर भावुक हो गये. श्रद्धालुओं की ओर से श्रीकृष्ण व सुदामा की जयकारे लगाते हुए पुष्पवर्षा की गयी. पटना से पहुंचे कथावाचक विनोद महाराज जी, तारापद साहू, पंचुगोपाल महतो, हेमसागर प्रधान समेत अन्य का कथावाचक पंडित महेंद्र शर्मा जी महाराज ने अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया.

भक्तों में बंटा प्रसाद:

कथा के समापन भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में परेश महतो, मुकेश महतो, भद्रनाथ महतो, विमल सरदार, नंदलाल उरांव, हेमंत महतो, मुकुंद महतो, रैबु गोप, देवा महतो, जगदीश महतो, कुशल उरांव, मनोज महतो, अरविंद उरांव, कृष्णा उरांव, अनिल उरांव, मृत्युंजय उरांव, जगन्नाथ महतो, दिगंबर सरदार, घासीराम महतो, सनत दास, ठुलू महतो, साधुचरण महतो की सराहनीय भूमिका रही.

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