दुर्गोत्सव के आगमन का संदेश दे रहे सरायकेला-खरसावां में लहराते कास के फूल

Durga Puja 2025: बारिश को मौसम के खात्मे और दुर्गोत्सव के आगमन का संदेश देते हैं कास के फूल. सरायकेला-खरसावां जिले में चारों ओर कास के फूल दिख रहे हैं. इससे लोग रोमांचित हैं. लोग कास के फूलों के बीच में जाकर फोटो सेशन करवा रहे हैं. कोई रील बना रहा है. हर कोई उत्सव के रंग में रंगने के लिए तैयार है.

Durga Puja 2025| खरसावां, शचिंद्र कुमार दाश : सरायकेला-खरसावां के पाहाड़ी क्षेत्र, नदी-तालाब के तट, खेतों की मेड़ों से लेकर बांध पोखर, पगडंडियों पर कास (काशी) के फूल लहलहा रहे हैं. सड़क किनारे लहराते कास के फूल राहगीरों को अपनी ओर आकर्शित कर रहे हैं. चारागाह हो, खेतों के मेड़ हों, गांवों की पगडंडियां हों या जलाशयों का किनारा. मानो सबने कास के घास और फूलों का तोरण-द्वार तैयार कर रखा है. हरियाली की चादर में टांके गये कास के सफेद फूलों का गोटा प्रकृति की अपने अनुपम शृंगार की सुंदर झलक है.

Durga Puja 2025: धरा पर 2 ही रंग- हरीतिमा और श्वेताभ

ऐसा लग रहा है मानो धरा पर श्वेताभ और हरीतिमा दो रंग ही शेष बचे हैं. यही रंग उत्सव का है. खुशी का रंग है, खुशहाली का रंग है. इन्हीं 2 रंगों में धन, धान्य, वैभव, शांति और उन्नति का भाग्य निहित है. बड़ी संख्या में लोग इन कास के फूलों के साथ फोटो सेशन भी करा रहे हैं. युवा वर्ग कास के फूलों के बीच मोबाFल पर रील्स भी बना रहे हैं. अमूमन देखा जाता है कि कास के ये फूल सितंबर में उगते हैं.

कास के फूल से हुआ धरा का शृंगार. फोटो : प्रभात खबर

वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आगमन का संकेत

कास के फूल वर्षा ऋतु के समापन और शरद ऋतु के आगमन का संकेत दे रहे हैं. कास के ये फूल नवरात्र के जल्द आने का भी संदेश दे रहे हैं. शारदीय उत्सव के शुरू होने से पहले ही कास या कांस के फूलों के जंगल परिपक्व हो जाते हैं. हल्की ठंड के बीच ठंडी बयार मानो मां दुर्गा के आगमन और उनके स्वागत का पूर्वाभ्यास कर रहा हो. दुर्गा पूजा में कास के फूलों का विशेष महत्व है. कहा जाता है कि कास के फूलों से शुद्धता आती है.

झारखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

हो समाज के मागे नृत्य में होता है कास के फूलों का उपयोग

झारखंड में युगों-युगों से यथावत ये कास के फूल उत्सवों-परंपराओं का साक्षी बनते रहे हैं. जंगलों-पठारों पर कास का फूलना कई उत्सवों के आगमन का संकेत है. बुरु (पहाड़ देवता) के पूजा में कास के फूलों का महात्म्य है. हो समुदाय के सबसे बड़े त्योहार मागे पर्व में नृत्य के दौरान भी कास के फूलों का उपयोग होता है. सितंबर में भी कास के फूलों को कागज में लपेटकर रखा जाता है और मागे नृत्य के दौरान इसका इस्तेमाल कर उड़ाया जाता है.

इसे भी पढ़ें

Jamshedpur News : प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक है कास फूल

Explainer: वर्षा ऋतु के समापन का संदेश देता कास का फूल, जानें मागे नृत्य में क्या होता उपयोग

मौसम के परिवर्तन का संकेत दे रहे काश के फूल, रांची के इन इलाकों में बने आकर्षण, औषधीय गुणों से है भरपूर

‘उगे अगस्त फूले बन कास, अब छोड़ो बरखा की आस’: कहावतों की मानें तो अब यूपी में बारिश की नहीं रह गयी आस

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >